पीपीगंज बाईपास पर हुआ बड़ा हादसा
रविवार को गोरखपुर के पीपीगंज बाईपास मार्ग पर वन विभाग चौकी के सामने एक भीषण सड़क हादसा सामने आया। इस हृदयविदारक घटना में एक तेज रफ्तार डंपर ने सड़क से गुजर रहे दंपती को अपनी चपेट में ले लिया और बुरी तरह रौंद डाला। हादसे का शिकार होने वाले लोगों की पहचान राजकुमार यादव उर्फ राजू और उनकी पत्नी रम्भा देवी के रूप में की गई है। राजकुमार यादव की उम्र 40 वर्ष थी जबकि उनकी पत्नी रम्भा देवी 35 वर्ष की थीं। डंपर की टक्कर इतनी भयंकर थी कि दोनों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस दुर्घटना की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आई और आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करते हुए शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सोमवार की शाम को करीब पांच बजे जब पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया समाप्त हुई तो दोनों मृतकों के शव उनके पैतृक गांव मखनहा टोला रबेलिया लाए गए। जैसे ही वाहन गांव की सीमा के भीतर पहुंचा, वहां पहले से मौजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण और रिश्तेदार गमगीन हो गए। मृत दंपती के घर से जब एक साथ दो अर्थियां उठीं तो वहां चीख-पुकार मच गई और उपस्थित हर व्यक्ति का कलेजा फट गया।
बुजुर्ग पिता ने दी नम आंखों से मुखाग्नि
गांव पहुंचने के बाद दोनों शवों को अंतिम संस्कार के लिए रोहिन नदी के मछरिहा घाट पर ले जाया गया। घाट पर मातम का माहौल था और बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी इस अंतिम विदाई में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। जब 65 वर्षीय बुजुर्ग पिता छन्नू लाल यादव ने अपने कांपते हुए हाथों से अपने बेटे राजकुमार यादव और बहू रम्भा देवी की चिताओं को मुखाग्नि दी, तो वह खुद को बिल्कुल संभाल नहीं सके। उम्र के इस पड़ाव पर अपने जवान बेटे और बहू को एक साथ खोने का गहरा आघात उनके सहनशक्ति से बाहर हो गया और वह फूट-फूटकर दहाड़ मारकर रोने लगे। एक पिता को इस प्रकार बुरी तरह टूटते हुए देखकर घाट पर मौजूद हर एक ग्रामवासी की आंखें नम हो गईं और लोग अपने आंसू नहीं रोक पाए। इस दुर्घटना ने पूरे परिवार को अंदर से हिला कर रख दिया है और परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोगों ने आगे बढ़कर इस कठिन समय में पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और सांत्वना दी। पुलिस इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पूरी कर चुकी है और हादसे के कारणों की जांच लगातार जारी है ताकि घटना की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
बीमार बेटे को दिखाने जाते समय हुआ हादसा
यह दर्दनाक दुर्घटना उस समय घटित हुई जब दंपती अपने 12 वर्षीय बेटे आदर्श यादव को दिखाने के लिए जा रहे थे। आदर्श की तबीयत काफी दिनों से खराब रहती है और माता-पिता उसे ही दिखाने के लिए घर से निकले थे। राजकुमार अपने माता-पिता छन्नू लाल और सुमित्रा देवी के बुढ़ापे का एकमात्र बड़ा सहारा थे। वह मुंबई शहर में ठेकेदारी के आधार पर कारपेंटर का काम करते थे और परिवार का भरण-पोषण करते थे। राजकुमार के कंधों पर अपने परिवार की जिम्मेदारी के साथ-साथ अपने दो छोटे भाइयों राजेश यादव और बृजेश यादव को पढ़ाने की भी बड़ी जिम्मेदारी थी। वह अपने दोनों छोटे भाइयों को अच्छी शिक्षा दिलाकर सेना में भर्ती कराने का बड़ा सपना संजोए हुए थे। उनके पीछे उनके तीन बच्चे छूट गए हैं जिनमें 12 वर्षीय बेटा आदर्श और छह वर्ष की दो जुड़वां बेटियां आस्था व रिया शामिल हैं। जिस घर में कुछ समय पहले तक बच्चों के भविष्य और खुशहाल जीवन की उम्मीदें पल रही थीं, वहां अब पूरी तरह से मातम और वीरानता छा गई है। अचानक हुए इस बड़े हादसे ने पूरे परिवार के सुनहरे सपनों को पलभर में चकनाचूर कर दिया है और छोटे-छोटे बच्चों के सिर से माता-पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है।