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सड़क की बदहाली: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर बिना बारिश के ही उखड़ी सड़क, 4200 करोड़ की लागत पर उठे सवाल

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की सड़क एक बार फिर से उखड़ गई है। बिना बारिश के ही सड़क खराब होने से इसकी निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 4200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की गई थी।

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Ankit Yadav
10 अक्ट 2026, 11:02
सड़क की बदहाली: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर बिना बारिश के ही उखड़ी सड़क, 4200 करोड़ की लागत पर उठे सवाल

एक्सरसाइज की सड़क क्षतिग्रस्त

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के दोबारा उखड़ने की घटना ने स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इस बड़ी सड़क परियोजना का निर्माण कार्य भारी बजट के साथ पूरा किया गया था ताकि आम जनता को सुगम यातायात की सुविधा मिल सके। प्राप्त जानकारी के अनुसार बिना किसी बारिश के मौसम या जलभराव के ही इस नए मार्ग की सतह पर खराबी देखने को मिली है। सड़क का इस तरह से समय से पहले ही क्षतिग्रस्त होना निर्माण कार्य की गुणवत्ता और मानकों पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। इस मार्ग से रोजाना गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों को सड़क की इस खराब स्थिति के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने इस मामले में गहरी नाराजगी व्यक्त की है क्योंकि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद सड़क को टिकाऊ नहीं बनाया जा सका। सड़क निर्माण में किस प्रकार की सामग्री का उपयोग किया गया था और तकनीकी मानकों की क्या स्थिति थी यह अब एक बड़ा सवाल बन गया है। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई ठोस सफाई सामने नहीं आई है लेकिन जनता में इसे लेकर काफी रोष देखा जा रहा है।

करोड़ों की लागत पर सवाल

इस विशाल एक्सप्रेसवे के निर्माण पर सरकार और संबंधित निर्माण एजेंसियों द्वारा कुल 4200 करोड़ रुपये की भारी धनराशि खर्च की गई थी। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी यदि सड़क इस तरह से बार-बार उखड़ जाती है तो यह प्रशासनिक और तकनीकी दक्षता पर सीधा प्रहार है। सड़क की सतह उखड़ने की इस घटना से जनता के खून-पसीने की कमाई के दुरुपयोग की आशंकाएं भी जोर पकड़ने लगी हैं। निर्माण कार्यों की देखरेख करने वाले विभागों की कार्यप्रणाली अब सीधे तौर पर कटघरे में खड़ी नजर आ रही है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों में यदि भ्रष्टाचार या लापरवाही बरती जाएगी तो देश के विकास को तगड़ा झटका लगेगा। इस पूरी परियोजना के निर्माण के दौरान जिन ठेकेदारों और इंजीनियरों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी उनकी जवाबदेही तय किया जाना बेहद आवश्यक हो गया है। बिना बरसात के ही सड़क के इस प्रकार से टूटने और बिखरने के कारणों की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर इतने महंगे प्रोजेक्ट की यह दुर्दशा क्यों और कैसे हो गई। इस प्रकार की घटनाएं देश की आधारभूत संरचना के विकास के दावों की पोल खोल देती हैं और आम नागरिकों में शासन प्रणाली के प्रति अविश्वास पैदा करती हैं।

बुनियादी ढांचे की पृष्ठभूमि

भारत जैसे विकासशील देश में एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाएं क्षेत्रीय विकास और आर्थिक प्रगति की रीढ़ मानी जाती हैं। इस तरह के आधुनिक मार्गों का मुख्य उद्देश्य दो बड़े शहरों के बीच की दूरी को कम करना और यात्रा के समय को बचाना होता है। लेकिन जब ऐसे ही महत्वपूर्ण और महंगे मार्ग निर्माण के तुरंत बाद या बिना किसी प्राकृतिक आपदा के ही टूटने लगते हैं तो पूरा उद्देश्य ही विफल हो जाता है। इस प्रकार की अव्यवस्था से न केवल सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचता है बल्कि देश की छवि भी धूमिल होती है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सड़क निर्माण से जुड़े सभी ठेकेदारों और अधिकारियों पर कड़ी नजर रखने की आवश्यकता है। गुणवत्ता नियंत्रण के जो मानक तय किए जाते हैं उनका कड़ाई से पालन कराना ही इस समस्या का एकमात्र स्थायी समाधान हो सकता है। आम नागरिकों को भी चाहिए कि वे ऐसे मामलों में अपनी आवाज उठाएं और स्थानीय प्रशासन से जवाब मांगें ताकि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस पूरी घटना से सबक लेकर संबंधित विभागों को भविष्य की योजनाओं में अधिक पारदर्शिता और मजबूती बरतने की जरूरत है। सड़क का इस प्रकार उखड़ना केवल एक तकनीकी खामी नहीं बल्कि प्रबंधन और निगरानी प्रणाली की एक बड़ी नाकामी को दर्शाता है।

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