पायलट प्रोजेक्ट के तहत चुनिंदा मार्गों पर मरम्मत
गाजियाबाद क्षेत्र में आधारभूत ढांचे को बेहतर बनाने की दिशा में एक नया अभियान शुरू किया गया है जिसके अंतर्गत एक आधुनिक निर्माण विधि का परीक्षण किया जा रहा है। इस योजना को फिलहाल प्रायोगिक आधार पर अमलीजामा पहनाया जा रहा है ताकि इसकी कार्यक्षमता का आंकलन किया जा सके। तय की गई रूपरेखा के अनुसार इस विशेष योजना के क्रियान्वयन की कुल समय सीमा चार महीने निर्धारित की गई है। प्रशासनिक निर्देशों के मुताबिक इस अवधि के भीतर तय किए गए सभी मार्गों पर काम पूरा किया जाना है। इस पूरी परियोजना के पहले चरण में शहर के कुछ चुनिंदा हिस्सों को शामिल किया गया है जिसमें एएलटी रोड से जुड़े मार्ग से लेकर अन्य प्रमुख स्थल आते हैं। इसमें राजनगर के एएलटी मार्ग से लेकर शनि मंदिर के रास्ते सेक्टर छह कट तक का क्षेत्र शामिल है। इसके अलावा वरदान अस्पताल से प्रारंभ होकर सेक्टर दस चौक होते हुए इंग्राहम स्कूल और वहां से सरस्वती विद्या मंदिर तक के हिस्से को इस सूची में रखा गया है। इन तमाम चिन्हित स्थानों पर इसी विशेष प्रणाली के जरिए काम किया जा रहा है।
मिश्रण और निर्माण की आधुनिक प्रक्रिया का स्वरूप
इस आधुनिक निर्माण पद्धति की मुख्य विशेषता इसकी पारंपरिक निर्माण प्रक्रियाओं से पूरी तरह भिन्न होना है जो इसे अधिक उपयोगी बनाती है। इस विधि के प्रयोग से सड़क की कुल मोटाई या उसकी ऊंचाई में कोई विशेष बढ़ोतरी दर्ज नहीं होती है। इस प्रक्रिया के दौरान पुरानी और उबड़-खाबड़ हो चुकी सड़क की ऊपरी सतह पर एक विशेष प्रकार का संयोजन तैयार करके डाला जाता है। इस तैयार किए जाने वाले मिश्रण में मुख्य रूप से तारकोल या बिटुमेन के साथ-साथ एक तय मानक वाले छोटे आकार के पत्थर यानी एग्रीगेट मिलाए जाते हैं। इसके अतिरिक्त इस सामग्री में पानी, सीमेंट और एक खास किस्म के पालिमर केमिकल को भी समान अनुपात में मिलाया जाता है। इन सभी घटकों को मिलाकर एक बेहद पतली परत तैयार की जाती है जिसे पुरानी और घिसी हुई सतह के ऊपर फैला दिया जाता है। यह अनूठी प्रक्रिया मुख्य रूप से उन पथों के लिए अत्यधिक उपयोगी साबित होती है जिनकी ऊपरी परत लगातार इस्तेमाल के कारण पूरी तरह घिस चुकी होती है। इस पतली सुरक्षात्मक परत के माध्यम से मार्ग को तेज धूप, लगातार नमी और पानी के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखा जाता है। इससे उस मार्ग की कुल जीवन अवधि कई वर्षों तक बढ़ जाती है।
जलभराव से मुक्ति और भविष्य की नई योजनाएं
शहर में जल निकासी की गंभीर समस्या लंबे समय से एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी जिसके कारण आम नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। हल्की या भारी बारिश के दौरान सड़कों पर पानी भर जाने से आवागमन बाधित होता था और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इस नई पद्धति के उपयोग से सतह की ऊंचाई न बढ़ने के कारण जलभराव की विकट समस्या से स्थाई रूप से राहत मिलने की पूरी उम्मीद है। जब सड़कों पर पानी का ठहराव नहीं होगा तो लगातार नमी और जलभराव के कारण बनने वाले गड्ढों और टूट-फूट से भी बचाव होगा। पानी के जमा होने से जो मार्ग आसानी से क्षतिग्रस्त हो जाते थे वे अब लंबे समय तक सुरक्षित बने रहेंगे। यह सड़क रखरखाव की एक अत्यंत आधुनिक, उन्नत और टिकाऊ प्रणाली है जो आने वाले समय में शहरी यातायात के लिए अत्यंत लाभप्रद सिद्ध होगी। इस पूरी प्रक्रिया के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में परखने के पश्चात शहर के अन्य विभिन्न भागों की सड़कों पर भी इसी तकनीक का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जाएगा।