सड़कों की जर्जर हालत के खिलाफ उक्रांद का विरोध प्रदर्शन उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में परिवहन और बुनियादी ढांचे की बदहाली इन दिनों स्थानीय निवासियों के लिए एक गंभीर समस्या बनती जा रही है जिसके चलते क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने आक्रामक रुख अपनाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में उत्तराखंड क्रांति दल यानी उक्रांद के कार्यकर्ताओं और स्थानीय पदाधिकारियों ने बागीश्वर क्षेत्र के भीतर सड़कों की दयनीय दशा को मुख्य मुद्दा बनाते हुए आगामी 27 तारीख को एक बड़े विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की है। संगठन से जुड़े नेताओं का आरोप है कि पिछले काफी समय से इस पर्वतीय जनपद के विभिन्न शहरी और ग्रामीण मोटर मार्गों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं जिनकी समय पर मरम्मत या डामरीकरण नहीं कराया जा रहा है। बरसात के मौसम के बाद इन रास्तों पर चलना आम नागरिकों, स्कूली बच्चों और बीमार व्यक्तियों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रह गया है। इस आसन्न प्रदर्शन के माध्यम से पार्टी के कार्यकर्ता जिला प्रशासन और संबंधित निर्माण विभागों को नींद से जगाने का प्रयास करेंगे ताकि आम जनता को इस नरकीय जीवन से तुरंत कुछ राहत मिल सके।
पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और लापरवाही का संकट उत्तराखंड जैसे भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील और दुर्गम राज्य में सुरक्षित और सुगम आवागमन हर नागरिक का बुनियादी अधिकार माना जाता है परंतु धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आती है। बागीश्वर जिले के अंतर्गत आने वाले मुख्य मार्गों से लेकर आंतरिक संपर्क मार्गों तक की हालत इतनी अधिक जर्जर हो चुकी है कि आए दिन वाहन दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। सरकारी महकमों द्वारा समय-समय पर सड़क सुधारीकरण के बड़े-बड़े दावे तो जरूर किए जाते हैं किंतु जमीनी स्तर पर मेंटेनेंस का काम कागजों तक ही सीमित होकर रह जाता है। क्षेत्रीय जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि विभाग की उदासीनता के कारण ठेकेदारों द्वारा घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है जिसके कारण पहली ही बरसात में सड़कें उखड़ने लगती हैं। उत्तराखंड क्रांति दल जैसे क्षेत्रीय संगठन इसी व्यवस्थागत लापरवाही के खिलाफ जनता की आवाज को बुलंद करने का कार्य कर रहे हैं ताकि शासन-प्रशासन की आंखें खुल सकें और इन महत्वपूर्ण मार्गों पर आवागमन को सुरक्षित बनाया जा सके।
प्रशासन पर बढ़ते दबाव और आगामी राजनीतिक रणनीतियां आगामी 27 तारीख को होने वाले इस उग्र प्रदर्शन के बाद स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ना तय माना जा रहा है क्योंकि विपक्षी दलों और क्षेत्रीय संगठनों का यह दबाव सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस प्रकार के जन आंदोलनों को समय रहते गंभीरता से नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में यह असंतोष एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है जिसका असर आगामी चुनावी समीकरणों पर भी पड़ना स्वाभाविक है। प्रदर्शन के दौरान उक्रांद के कार्यकर्ता ज्ञापन सौंपकर तय समय सीमा के भीतर सभी खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत शुरू करने की जोरदार मांग करेंगे। अगर प्रशासन द्वारा इस चेतावनी के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है तो संगठन ने भविष्य में इस आंदोलन को और अधिक तीव्र तथा व्यापक रूप देने की स्पष्ट चेतावनी भी दी है जिससे सरकार और स्थानीय प्रशासन दोनों पर जल्द से जल्द कार्रवाई करने का भारी नैतिक दबाव बन रहा है।