सिरौलीगौसपुर में कटाव का संकट
बाराबंकी जिले के सिरौलीगौसपुर इलाके में सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान के नीचे आ गया है। जलस्तर घटने के साथ ही नदी किनारे बसे गांवों में भूमि कटाव की प्रक्रिया ने भयावह रूप ले लिया है। इस जलप्रवाह के चलते अब तक सैकड़ों बीघा कृषि योग्य भूमि नदी की गोद में विलीन हो चुकी है। स्थानीय किसानों की उपजाऊ जमीन हर बीतते घंटे के साथ कम होती जा रही है, जिससे उनके सामने जीविका का गहरा संकट उत्पन्न हो गया है। कोठीडीहा और घुटरू जैसे गांव अब नदी की तेज धारा के सीधे निशाने पर आ गए हैं, जिससे वहां रहने वाली आबादी में भारी दहशत का माहौल है। खेती का बड़ा हिस्सा डूबने के कारण किसानों को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। नदी ने अपनी पुरानी दिशा को छोड़ते हुए अब आवासीय क्षेत्रों की तरफ रुख कर लिया है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
प्रशासनिक सर्वे और ग्रामीणों की मांग
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन और बाढ़ खंड विभाग द्वारा इस गंभीर मुद्दे पर अभी तक कोई ठोस स्थायी इंतजाम नहीं किए गए हैं। किसान अनूप सिंह के अनुसार नेपाल से आने वाली सिल्ट यानी गाद ने नदी की मुख्य धारा का रास्ता पूरी तरह बदल दिया है। इस बदलाव की वजह से अब नदी का पानी आबादी वाले गांवों की ओर बढ़ रहा है, जो खतरे का संकेत है। प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से सुरक्षात्मक कार्य शुरू किए जाएं ताकि आगे होने वाले नुकसान को रोका जा सके। इस मुद्दे पर एसडीएम अनिल कुमार सरोज ने जानकारी दी है कि प्रशासन द्वारा कटाव वाले स्थानों का सर्वे किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट पूरी होने के बाद ही भविष्य की सुरक्षा कार्य योजना तैयार की जाएगी और जरूरी कदम उठाए जाएंगे, ताकि जन-धन की हानि को टाला जा सके।
समाधान की प्रतीक्षा में ग्रामीण
ग्रामीणों का यह दर्द हर साल बाढ़ के बाद दोहराया जाता है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी समाधान नहीं निकाला गया है। हर साल की तरह इस बार भी जलस्तर में कमी आने के साथ ही नदी ने जमीन को काटना शुरू कर दिया है, जो किसानों की मेहनत को पल भर में नष्ट कर रहा है। समय रहते यदि कटाव रोकने के इंतजाम नहीं किए गए, तो कृषि भूमि के साथ ही रिहायशी इलाके भी इस आपदा की चपेट में आ सकते हैं। स्थानीय लोग अब अपनी जमीन और मकान बचाने के लिए सरकार से ठोस तटबंध बनाने की गुहार लगा रहे हैं। किसानों के लिए खेती ही आय का एकमात्र साधन है, जो अब सरयू के तेज कटाव के कारण धीरे-धीरे खत्म हो रही है। प्रशासन के सर्वे और उसके आधार पर ली जाने वाली कार्रवाई का ग्रामीण इंतजार कर रहे हैं, ताकि भविष्य में उन्हें इस त्रासदी से छुटकारा मिल सके।