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सिंधी गायन प्रतियोगिता: अयोध्या के रामनगर में सुरों की महफिल, बच्चों और महिलाओं ने दिखाया हुनर

अयोध्या के रामनगर स्थित शिवालय परिवार में एक भव्य सिंधी गायन प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इसमें 50 से अधिक प्रतिभागियों ने पारंपरिक सिंधी गीतों और भजनों की अपनी मधुर प्रस्तुतियां दीं।

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Ankit Yadav
14 अक्ट 2026, 06:46
सिंधी गायन प्रतियोगिता: अयोध्या के रामनगर में सुरों की महफिल, बच्चों और महिलाओं ने दिखाया हुनर

राम नगर में गायन प्रतियोगिता का आयोजन

अयोध्या के रामनगर इलाके में स्थित शिवालय परिवार के प्रांगण में हाल ही में सिंधी गायन प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में सिंधी संस्कृति को बढ़ावा देने और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया गया। प्रतियोगिता में 50 से अधिक बच्चों और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। पूरा आयोजन महंत गणेश दास के सानिध्य में संपन्न हुआ, जिन्होंने कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों का मार्गदर्शन किया। इस गायन प्रतियोगिता का संचालन सिंधी समाज के प्रवक्ता ओमप्रकाश ओमी ने किया। मंच पर मौजूद सभी प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए सिंधी गीतों और भजनों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। यह आयोजन न केवल एक प्रतियोगिता थी, बल्कि सिंधी समुदाय के लिए अपनी प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करने का एक सशक्त माध्यम भी साबित हुई। रामनगर कॉलोनी के शिवालय परिवार में आयोजित इस कार्यक्रम ने स्थानीय लोगों का काफी ध्यान आकर्षित किया और बड़ी संख्या में लोग इस गायन प्रतियोगिता का साक्षी बनने के लिए वहां एकत्रित हुए थे।

प्रतिभागियों का प्रदर्शन और निर्णायक मंडल

गायन प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को दो अलग-अलग वर्गों में विभाजित किया गया था ताकि प्रतिस्पर्धा को निष्पक्ष बनाया जा सके। समूह 'ए' में 5 वर्ष से लेकर 15 वर्ष तक के बच्चे शामिल थे, जबकि समूह 'बी' में 16 वर्ष से 60 वर्ष तक के आयु वर्ग के प्रतिभागियों को रखा गया था। कलाकारों ने 'ठार माता ठार', 'आयोलाल झूलेलाल' और 'दमा दम मस्त कलंदर' जैसे प्रसिद्ध सिंधी गीतों और भजनों की प्रस्तुति दी। प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए एक विशेष निर्णायक मंडल का गठन किया गया था, जिसमें रेशमा अंदानी, कोमल लखमानी और काव्या मध्यान शामिल थीं। इन विशेषज्ञों ने गायन की बारीकियों और प्रस्तुति के कौशल को ध्यान में रखते हुए सभी कलाकारों का आकलन किया। कार्यक्रम के दौरान हिमांशी पांडे और तुलसीदास संगतानी जैसे कई समाजसेवक भी मौजूद रहे, जिन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। महंत गणेश दास ने स्पष्ट किया कि इस तरह के आयोजनों के माध्यम से प्राचीन सिंधी गीतों और भजनों को नई पीढ़ी के बीच जीवित रखने का उद्देश्य पूरा किया जा रहा है। सभी कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति में पूरी लगन और मेहनत दिखाई।

सांस्कृतिक संरक्षण और भविष्य की योजना

इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य सिंधी समुदाय की प्राचीन संगीत विरासत को संरक्षित करना और उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है। महंत गणेश दास के अनुसार, सिंधी गीतों और भजनों में जो गहराई और भाव है, उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है। आयोजन के दौरान समाज सेवकों और उपस्थित श्रोताओं ने एक स्वर में कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम सामाजिक एकता और अपनी भाषा के प्रति प्रेम बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रतियोगिता के परिणामों को लेकर भी प्रतिभागियों में काफी उत्साह देखा गया। आयोजकों ने घोषणा की है कि गायन प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार नवरात्र के बाद आयोजित होने वाले एक विशेष समारोह में प्रदान किए जाएंगे। इस सांस्कृतिक गतिविधि ने न केवल स्थानीय स्तर पर कलाकारों को मंच प्रदान किया, बल्कि भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की संभावनाओं को प्रबल कर दिया है। यह आयोजन सिंधी समुदाय के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जिससे समुदाय के लोगों में अपनी संस्कृति को सहेजने का संकल्प और अधिक मजबूत हुआ है।

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