फर्नीचर की कमी पर अधिकारियों की कार्रवाई
कानपुर नगर के सरकारी विद्यालयों में फर्नीचर का घोर अभाव बना हुआ है, जिसके कारण छात्रों को दो शैक्षणिक सत्रों से जमीन पर बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या को सामने आने के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हरिओम सिंह ने त्वरित कार्रवाई शुरू की है। उन्होंने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को एक आधिकारिक पत्र जारी कर अपने-अपने ब्लॉक के स्कूलों में वर्तमान में उपलब्ध फर्नीचर और इसकी वास्तविक कमी का विस्तृत ब्यौरा दो दिनों के भीतर प्रस्तुत करने का कड़ा निर्देश दिया है। इस निर्देश के बाद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के खंड शिक्षा अधिकारियों ने अपने अंतर्गत संचालित स्कूलों के प्रभारी प्रधानाध्यापकों को रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत को समझना और बच्चों की सुविधा के लिए जल्द से जल्द फर्नीचर की व्यवस्था करना है। विभाग अब इस जानकारी के आधार पर आगे की रणनीति तैयार करेगा ताकि छात्रों को बुनियादी सुविधाएं मिल सकें।
अधिकारियों के दावे और सीएसआर का सहारा
जिला समन्वयक प्रवीण कुमार पांडेय ने बताया कि पिछले समय में तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी सुरजीत कुमार सिंह के प्रयासों से कुछ स्कूलों में फर्नीचर उपलब्ध कराए गए थे। उस दौरान कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी यानी सीएसआर के तहत पनकी पावर प्लांट प्रबंधन द्वारा 41 सरकारी स्कूलों को 543 डेस्क और बेंच प्रदान किए गए थे। इसी तरह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड कंपनी ने भी अपने सीएसआर फंड से दो स्कूलों में 100-100 बेंच और डेस्क की व्यवस्था की थी। वर्तमान में नए बेसिक शिक्षा अधिकारी हरिओम सिंह भी इसी तरह की मदद जुटाने के लिए विभिन्न कंपनियों और स्थानीय उद्यमियों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। हालांकि, स्कूलों में व्याप्त अव्यवस्थाओं को छिपाने के लिए कुछ शिक्षक और प्रधानाध्यापक मीडिया से बात करने में कतरा रहे हैं और विभागीय अनुमति न होने का बहाना बना रहे हैं। शिक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऐसी कोई भी मनाही नहीं है, लेकिन स्कूलों में फर्नीचर की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है जिसे हल करने का प्रयास जारी है।
जिलाधिकारी का संज्ञान और भविष्य की योजना
कानपुर नगर के जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने स्कूलों में फर्नीचर न होने के मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने साफ कहा है कि इस प्रकरण की पूरी जानकारी बेसिक शिक्षा अधिकारी से ली जाएगी और इसमें कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी इस बात की भी जांच करेंगे कि क्या शासन को फर्नीचर के लिए कोई आधिकारिक मांगपत्र भेजा गया था या नहीं और बजट जारी करने की वर्तमान सरकारी प्रक्रिया क्या है। इन सभी बिंदुओं पर बेसिक शिक्षा अधिकारी के साथ चर्चा करने के बाद जिलाधिकारी शासन स्तर पर पत्राचार करेंगे ताकि बजट आवंटित हो सके। भविष्य की योजना के तहत सरकार से बजट मिलने और सीएसआर फंड के सहयोग से स्कूलों में फर्नीचर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि छात्रों को जल्द से जल्द बैठने के लिए उचित डेस्क और बेंच मिल सकें ताकि उनकी पढ़ाई में कोई बाधा उत्पन्न न हो। प्रशासन ने इस मामले को प्राथमिकता पर रखते हुए जल्द समाधान का भरोसा दिया है।