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सुरक्षा इंतजाम: रोडवेज बसों के डीजल टैंक में लगेंगे सेंसरयुक्त डिवाइस और खास वॉल्व

उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने बसों में हो रही ईंधन चोरी रोकने के लिए एक नई योजना तैयार की है। इसके तहत नई बसों के टैंकों में विशेष सेंसर और वॉल्व लगाए जाएंगे।

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Ankit Yadav
09 अक्ट 2026, 11:17
सुरक्षा इंतजाम: रोडवेज बसों के डीजल टैंक में लगेंगे सेंसरयुक्त डिवाइस और खास वॉल्व

परिवहन निगम की नई पहल और तकनीकी योजना

लखनऊ से सामने आई जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में रोडवेज बसों से ईंधन चोरी की समस्या को पूरी तरह खत्म करने के लिए परिवहन निगम ने एक ठोस कदम उठाया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब बसों के डीजल टैंक में विशेष रूप से सेंसरयुक्त डिवाइस स्थापित किए जाएंगे। इन आधुनिक उपकरणों के माध्यम से ईंधन की कुल खपत पर लगातार पैनी नजर रखी जा सकेगी और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होने पर तत्काल संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना मिल जाएगी। इस पूरी तकनीक का मुख्य उद्देश्य ईंधन की चोरी को रोकना और परिवहन निगम को हर साल होने वाले भारी आर्थिक नुकसान से बचाना है। निगम द्वारा अब खरीदी जाने वाली नई बसों की चेसिस के लिए जारी होने वाले टेंडर में यह शर्त पूरी तरह अनिवार्य कर दी गई है। इसके तहत सभी ऑटोमोबाइल कंपनियों को अपनी तरफ से नई बसों के डीजल टैंक में यह सेंसर लगाकर ही आपूर्ति करनी होगी। मौजूदा योजना के अंतर्गत कुल एक हजार नई बसों में इस उन्नत तकनीक को लगाने की पूरी तैयारी कर ली गई है ताकि ईंधन सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

टैंक की निगरानी और सुरक्षा के लिए खास वॉल्व

इस तकनीकी निगरानी प्रणाली के अलावा परिवहन निगम की बसों के डीजल टैंक में खास तरह के विशेष वॉल्व लगाने की भी योजना बनाई गई है। इन वॉल्व की बनावट ऐसी होगी कि टैंक के अंदर डाले गए ईंधन को किसी भी बाहरी व्यक्ति द्वारा आसानी से बाहर निकाल पाना बेहद मुश्किल साबित होगा। इससे उन तमाम घटनाओं पर स्वतः रोक लग जाएगी जहाँ बस से ईंधन निकालकर चोरी करने का प्रयास किया जाता था। सेंसर के जरिए न केवल ईंधन की चोरी का पता चलेगा बल्कि टैंक में किसी भी तरह की लीकेज होने पर भी तुरंत सटीक जानकारी मिल जाएगी। बस के टैंक में मौजूद कुल ईंधन और उसके उपयोग पर पूरी पारदर्शिता के साथ नजर रखी जा सकेगी जिससे चालकों और अन्य कर्मियों द्वारा होने वाली अवैध गतिविधियों पर लगाम लगेगी। नई बसों के निर्माण के समय ही इन सुरक्षा उपकरणों को लगाना अनिवार्य करने से भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं से काफी हद तक निजात मिलने की पूरी उम्मीद है। अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया पर अपनी सीधी नजर रखेंगे ताकि निर्धारित दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

पुरानी घटनाएं और इस व्यवस्था से मिलने वाले लाभ

रोडवेज बसों से ईंधन चोरी होने के मामले पहले भी लगातार सामने आते रहे हैं जिनके कारण निगम को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा था। पिछले साल अवध बस डिपो से कुल 2,879 लीटर ईंधन चोरी होने का बड़ा मामला प्रकाश में आया था। इसके अलावा खुर्जा डिपो में लगभग दो साल तक इस प्रकार की घटनाएं लगातार होती रहीं जिनमें संलिप्त पाए जाने पर छह चालकों को निलंबित कर दिया गया था। इससे पहले 25 नवंबर 2021 को कैसरबाग डिपो की सात अलग-अलग बसों से 60 लीटर ईंधन चोरी होने की घटना भी दर्ज की गई थी। इन सभी पुरानी घटनाओं से सबक लेते हुए अब इस नई तकनीक और विशेष वॉल्व के माध्यम से ऐसी हरकतों पर पूरी तरह रोक लगाने की पुख्ता तैयारी कर ली गई है। यदि यह नई व्यवस्था जमीनी स्तर पर पूरी तरह प्रभावी साबित होती है तो इससे ईंधन की भारी बचत होगी और परिवहन निगम के कुल खर्च को कम करने में भी बहुत मदद मिलेगी। इस प्रकार की तकनीकी सख्ती से प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार होगा और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।

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