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स्वास्थ्य सेवा में उपलब्धि: एनसीडी स्क्रीनिंग में बिजनौर ने उत्तर प्रदेश में हासिल किया तीसरा स्थान

बिजनौर जिले ने गैर-संचारी रोगों यानी एनसीडी की स्क्रीनिंग प्रक्रिया में प्रदेश स्तर पर बड़ी सफलता अर्जित की है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित इस विशेष अभियान में जिले को पूरे उत्तर प्रदेश में तीसरा स्थान मिला है।

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Ankit Yadav
09 अक्ट 2026, 11:44
स्वास्थ्य सेवा में उपलब्धि: एनसीडी स्क्रीनिंग में बिजनौर ने उत्तर प्रदेश में हासिल किया तीसरा स्थान

स्क्रीनिंग अभियान में जिले की बड़ी उपलब्धि

बिजनौर जिला स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने में सफल रहा है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार गैर-संचारी रोगों यानी एनसीडी स्क्रीनिंग के काम में जिले को पूरे उत्तर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। एनसीडी स्क्रीनिंग के अंतर्गत मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी बीमारियों जैसी उन गंभीर समस्याओं की पहचान की जाती है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती हैं। जिले की चिकित्सा टीम ने निर्धारित मानकों के अनुसार मरीजों की जांच और डेटा अपलोड करने का कार्य तेजी से पूरा किया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 9 अक्टूबर 2026 को मिली जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट है कि बिजनौर की स्वास्थ्य इकाइयां इस कार्य में काफी सक्रिय रही हैं। इस सफलता के पीछे स्वास्थ्य कर्मियों का निरंतर प्रयास और जमीनी स्तर पर जांच केंद्रों की सक्रियता मुख्य रूप से जिम्मेदार है। जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर आम जनता की जांच की गति को बढ़ाने से ही यह रैंकिंग संभव हो सकी है। सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के भीतर यह उपलब्धि जिले की बेहतर कार्यक्षमता का प्रमाण मानी जा रही है।

प्रक्रिया का संचालन और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका

एनसीडी स्क्रीनिंग के इस अभियान के संचालन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विशेष निर्देश दिए गए थे। जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक केंद्रों पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने निर्धारित अवधि के भीतर मरीजों की स्क्रीनिंग का कार्य व्यवस्थित तरीके से पूर्ण किया है। स्क्रीनिंग प्रक्रिया में शामिल किए गए लोगों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का डिजिटल संकलन करना इस कार्य का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने समय-समय पर इस स्क्रीनिंग अभियान की प्रगति की समीक्षा की ताकि कोई भी लक्ष्य अधूरा न रहे। बिजनौर के स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस मामले में बेहतर समन्वय का परिचय देते हुए रिपोर्टिंग का काम समय पर पूरा किया है। स्क्रीनिंग के दौरान मिली जानकारी को पोर्टल पर अपडेट करना अनिवार्य था ताकि राज्य स्तर पर सही गणना की जा सके। इस प्रक्रिया में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर या शिविरों के माध्यम से लोगों की जांच सुनिश्चित की है। स्वास्थ्य तंत्र की मजबूती के कारण ही यह उपलब्धि बिजनौर के नाम दर्ज हो पाई है। विभाग के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति दोनों का विशेष ध्यान रखा गया था ताकि मरीजों का डेटा सही तरह से दर्ज किया जा सके।

एनसीडी स्क्रीनिंग का महत्व और भविष्य की राह

गैर-संचारी रोग यानी एनसीडी वर्तमान समय में भारत सहित पूरे विश्व में स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुके हैं। इन बीमारियों में कैंसर, मधुमेह और सांस संबंधी रोगों का समावेश होता है जो लंबे समय तक व्यक्ति को प्रभावित करते हैं। सरकार की एनसीडी स्क्रीनिंग नीति का मुख्य उद्देश्य इन बीमारियों का शुरुआती अवस्था में पता लगाना है ताकि उनका उपचार आसान हो सके। जब बीमारी का निदान समय पर हो जाता है तो इलाज का खर्च कम होता है और मरीज के ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। बिजनौर का प्रदेश में तीसरा स्थान आना यह दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर लोग अब अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं। भविष्य में इस प्रकार के और भी स्क्रीनिंग अभियान चलाए जाने की संभावना है ताकि अधिक से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में लाया जा सके। आने वाले समय में स्वास्थ्य विभाग का ध्यान इस स्क्रीनिंग के डेटा के आधार पर उपचार सेवाओं को और भी अधिक बेहतर बनाने पर रहेगा। जिले की इस कामयाबी से अन्य जिलों के स्वास्थ्य तंत्र को भी एनसीडी की जांच में तेजी लाने की प्रेरणा मिलेगी। स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए समय पर की गई ऐसी स्क्रीनिंग सबसे प्रभावी कदम साबित होती है।

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