योजना के तहत मिलने वाली मुख्य सुविधाएं
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 के अंतर्गत कुल 25 ट्रेडों से जुड़े कारीगरों और कामगारों को इसका लाभ प्रदान किया जाएगा। पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक और बाजार के साथ जोड़कर कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। झांसी के उपायुक्त उद्योग मनीष चौधरी ने इस बारे में विस्तार से जानकारी साझा की है। योजना के नियमों के अनुसार सभी पात्र लाभार्थियों को 10 दिनों का निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण का यह कार्यक्रम पूरा होने के बाद सभी योग्य लोगों को आधिकारिक प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही अधिकतम 15 हजार रुपये तक की टूलकिट भी दी जाएगी ताकि वे अपना काम आसानी से शुरू कर सकें। इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य लक्ष्य स्थानीय कारीगरों को आर्थिक रूप से मजबूत करना और उन्हें स्थायी स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है ताकि वे अपनी आजीविका बेहतर ढंग से चला सकें।
प्रशिक्षण अवधि और मानदेय का विवरण
कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले प्रत्येक प्रशिक्षार्थी को पढ़ाई या प्रशिक्षण के दिनों में वित्तीय सहायता दी जाएगी। प्रशिक्षण की अवधि के दौरान हर एक प्रतिभागी को प्रतिदिन 500 रुपये की दर से मानदेय मिलेगा। यह पूरी राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से प्रशिक्षार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। अधिकतम मानदेय की सीमा 5 हजार रुपये तय की गई है जो प्रशिक्षण पूरा होने पर मिलती है। इसके अलावा नया व्यवसाय शुरू करने या अपने पुराने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए ऋण की बड़ी सुविधा दी गई है। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी कारीगरों को स्वरोजगार के वास्ते 10 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान रखा गया है। इस वित्तीय सहायता की मदद से लाभार्थी बिना किसी ब्याज के बोझ के अपने कारोबार को नया आयाम दे सकते हैं और अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
योजना में शामिल विभिन्न पारंपरिक और आधुनिक ट्रेड
इस कल्याणकारी योजना के दायरे में कई प्रकार के पारंपरिक और आधुनिक व्यवसायों को शामिल किया गया है। पारंपरिक ट्रेडों की सूची में बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार और नाई जैसे कामगार आते हैं। इसके अलावा राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी भी इसका हिस्सा हैं। आधुनिक और नए पारंपरिक ट्रेडों के अंतर्गत मूर्तिकार, मालाकार, धोबघाट या धोबाना, भरतभूजा और मछुआरा जैसे काम शामिल हैं। साथ ही मोबाइल मरम्मत, ऑटोमोबाइल मरम्मत, इलेक्ट्रॉनिक सामान की मरम्मत और बिजली सामान की मरम्मत करने वालों को भी जोड़ा गया है। प्लम्बर, कम्प्यूटर मरम्मत, सोलर इंस्टालेशन, डिजिटल फोटोग्राफी तथा सॉफ्टवेयर और वेलनेस से जुड़े आधुनिक ट्रेड भी इसमें जगह पा चुके हैं। इस प्रकार विभिन्न क्षेत्रों के हुनरमंद लोगों को अपनी योग्यता निखारने का पूरा अवसर मिल रहा है जिससे जिले में रोजगार के नए रास्ते खुल रहे हैं।