आगरा में बेलगाम डग्गेमारों का आतंक
उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक जिले आगरा में यातायात व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह से चरमराई हुई नजर आ रही है। स्थानीय सड़कों पर डग्गेमार वाहनों का संचालन पूरी तरह से बेलगाम हो चुका है और इन पर किसी भी प्रकार का प्रभावी नियंत्रण दिखाई नहीं दे रहा है। स्थिति यह है कि ये वाहन बिना किसी डर के यातायात नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और सड़कों पर मनमाने तरीके से अपने वाहनों का संचालन कर रहे हैं। इन अनधिकृत वाहनों की वजह से सड़क पर चलने वाले आम चालकों और राहगीरों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि यातायात नियमों का पालन करवाने की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस की नजरों के सामने ही सब कुछ हो रहा है और पुलिस इन वाहनों को बस देखती रहती है। पुलिस और प्रशासन की इस चुप्पी तथा निष्क्रियता के कारण इन वाहन चालकों के हौसले दिन-प्रतिदिन और अधिक बुलंद होते जा रहे हैं।
जाम की समस्या से जूझती जनता
आगरा की सड़कों पर इन दिनों आम जनता को भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। डग्गेमार वाहनों के बेतरतीब ढंग से खड़े होने और बिना अनुमति के संचालन के कारण मुख्य मार्गों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इस भयंकर जाम की वजह से दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, स्कूली बच्चों और मरीजों को ले जाने वाली एम्बुलेंस को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लोग घंटों तक जाम में फंसे रहते हैं और उनका कीमती समय बर्बाद होता है। इसके बावजूद स्थिति को सुधारने के लिए जमीन पर कोई ठोस प्रशासनिक कदम उठाया जाता हुआ नजर नहीं आ रहा है। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है कि सड़कों पर इतना बड़ा संकट खड़ा होने के बावजूद संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह से मुंह मोड़ चुके हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जिम्मेदार विभाग किसी बड़े हादसे या गंभीर स्थिति का इंतजार कर रहा है ताकि वह अपनी नींद से जाग सके।
जिम्मेदार अधिकारियों की गहरी नींद
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिन प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के कंधों पर शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी है, वे पूरी तरह से उदासीन बने हुए हैं। आम जनता का सड़कों पर परेशान होना और जाम से जूझना जैसे अधिकारियों की प्राथमिकताओं में शामिल ही नहीं है। पुलिस और प्रशासन के स्तर पर इस तरह की लापरवाही न केवल शहर की कानून और व्यवस्था को चुनौती देती है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन को भी जोखिम में डालती है। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले इन डग्गेमार वाहनों पर कार्रवाई करने के बजाय अधिकारियों की चुप्पी कई तरह के गंभीर सवाल खड़े करती है। इस प्रकार की समस्याओं से निपटने के लिए यातायात विभाग को तुरंत विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता है ताकि अवैध वाहनों पर नकेल कसी जा सके। जब तक जिम्मेदार अधिकारी अपनी कुंभकर्णी नींद से जागकर सख्त और प्रभावी कदम नहीं उठाएंगे, तब तक आगरा की सड़कों पर आम जनता को इस तरह की परेशानियों से मुक्ति मिलना बेहद मुश्किल नजर आता है।