मध्य प्रदेश के भीतर संचालित होने वाले विभिन्न पेट्रोल पंपों पर आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को डिजिटल भुगतान के मामले में एक नए बदलाव का सामना करना पड़ सकता है। ताजा निर्णय के अनुसार, राज्य के पेट्रोल पंप डीलरों ने यह तय किया है कि ईंधन भरवाने वाले वाहन चालकों से दो हजार रुपये से कम राशि के भुगतानों के लिए यूपीआई माध्यम का उपयोग नहीं करने दिया जाएगा। इस कदम का सीधा असर उन आम ग्राहकों पर पड़ेगा जो आमतौर पर बहुत छोटी मात्रा में पेट्रोल या डीजल खरीदते हैं और अपनी सुविधा के लिए मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए तुरंत डिजिटल भुगतान कर देते हैं। डीलरों की तरफ से उठाए गए इस सख्त कदम ने राज्य के मोटर चालकों के बीच असमंजस और चिंता की स्थिति पैदा कर दी है, क्योंकि डिजिटल इंडिया के इस दौर में लोग छोटे भुगतानों के लिए भी नकदी लेकर चलने से बचने लगे हैं।
इस प्रकार के अप्रत्याशित निर्णय के पीछे पेट्रोल पंप संचालकों की अपनी व्यावसायिक और वित्तीय चुनौतियां जुड़ी हुई हैं। खुदरा ईंधन विक्रेताओं का तर्क है कि छोटे डिजिटल लेन-देन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट या अन्य तकनीकी तथा बैंकिंग शुल्कों के कारण उनके मुनाफे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। हालांकि देश भर में डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए सरकार और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम लगातार जोर दे रहे हैं, परंतु ईंधन जैसे कम मार्जिन वाले उत्पादों के खुदरा विक्रेताओं को बैंकों के माध्यम से राशि मिलने और उसके बंदोबस्त में कई प्रकार की व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पंप संचालकों और विभिन्न पेट्रोलियम एसोसिएशनों के बीच इन मुद्दों को लेकर लंबे समय से मंथन चल रहा था, जिसके परिणामस्वरूप अब यह बड़ा कदम उठाया गया है ताकि बैंक शुल्कों के वित्तीय बोझ से राहत मिल सके।
इस नए बदलाव के लागू होने से आने वाले समय में मध्य प्रदेश के परिवहन और खुदरा ईंधन बाजार पर व्यापक असर पड़ने की पूरी संभावना है। उपभोक्ताओं को अब दो हजार रुपये से कम के ईंधन क्रय के लिए या तो अधिक मात्रा में पेट्रोल-डीजल डलवाना होगा या फिर पारंपरिक नकदी यानी कैश का ही इस्तेमाल करना पड़ेगा, जो आज के समय में कई लोगों के लिए असुविधाजनक साबित हो सकता है। दूसरी ओर, यदि अन्य राज्यों के डीलर भी इस तरह के किसी कदम का अनुसरण करते हैं, तो यह देश भर में चल रहे डिजिटल भुगतान अभियान के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर सकता है। फिलहाल स्थानीय स्तर पर ग्राहकों और पंप मालिकों के बीच इस बात को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, और आने वाले दिनों में इस मामले पर किसी प्रशासनिक या बैंकिंग समझौते की उम्मीद भी जताई जा रही है ताकि उपभोक्ताओं की परेशानियों का कोई उचित समाधान निकाला जा सके।