चक्रवात के कारण छिपा चांद
वाराणसी में करवाचौथ के पावन अवसर पर चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव के कारण व्रती महिलाओं को बेहद लंबा इंतजार करना पड़ा। पिछले दो दिनों से शाम के समय लगातार पसरी रहने वाली चटक चांदनी गुरुवार को पूरी तरह से गायब नजर आई। आसमान में घने बादलों के छाए रहने के कारण चंद्रमा पूरी तरह से बादलों की ओट में छिपा रह गया। सुबह के समय से ही शुरू हुई रिमझिम फुहारें शाम ढलने के बाद भी लगातार जारी रहीं। दिनभर बिना पानी के कठिन निर्जला व्रत का पालन करने वाली महिलाएं शाम होते ही चंद्रदर्शन के लिए उत्सुकता से टकटकी लगाए बैठी रहीं। शाम ढलते-ढलते सभी महिलाओं ने सोलह शृंगार कर लिया था और वे पूरी तरह से पूजन की तैयारियों में जुट चुकी थीं। बावजूद इसके चंद्रमा के प्रकट होने का इंतजार लगातार बढ़ता चला गया और आसमान पूरी तरह बादलों से ढका रहा। करवाचौथ पूजन के लिए शुभ मुहूर्त शाम छह बजे से आठ बजे के बीच निर्धारित किया गया था, जबकि चंद्रोदय का आधिकारिक समय सात बजकर सत्तावन मिनट पर था। निर्धारित समय सीमा के भीतर चंद्रमा के दर्शन न हो पाने के कारण व्रती महिलाओं के मन में चिंता की स्थिति पैदा होने लगी थी। हालांकि सभी को इस बात की गहरी उम्मीद थी कि शाम ढलते-ढलते किसी न किसी कोने से प्रेम के प्रतीक चंद्रमा के दीदार अवश्य हो जाएंगे।
मोबाइल और मानस दर्शन का सहारा
निर्धारित शुभ मुहूर्त के भीतर चंद्रमा के स्पष्ट दर्शन न हो पाने की वजह से व्रती महिलाओं ने परिवार के बुजुर्गों और स्थानीय ज्योतिषियों से विशेष सलाह ली। ज्योतिषियों की सलाह के बाद तय किए गए मुहूर्त में कुछ महिलाओं ने मानसिक रूप से चंद्रमा की कल्पना कर मानस दर्शन किया और अपने पति का चेहरा निहारा। वहीं दूसरी ओर कुछ अन्य महिलाओं ने आधुनिक तकनीक का अनूठा सहारा लेते हुए अपने मोबाइल फोन की स्क्रीन पर इंटरनेट के जरिए चंद्रदर्शन किए। इसके साथ ही कई महिलाओं ने चलनी और दीपक का पारंपरिक इस्तेमाल करते हुए चंद्रमा के मानस दर्शन की प्रक्रिया को पूरी निष्ठा के साथ संपन्न किया। मोबाइल और मानस दर्शन की इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद महिलाओं ने अपने सामने खड़े पति का दीदार किया और उनकी लंबी उम्र की कामना की। अपने दांपत्य जीवन के अटूट बंधन को मजबूत बनाए रखने की प्रार्थना करते हुए व्रती महिलाओं ने अंततः जल ग्रहण किया और अपने कठिन व्रत का समापन किया। इस प्रकार मौसम की इस अप्रत्याशित बाधा के बीच भी महिलाओं ने पूरी आस्था के साथ अपने पारंपरिक अनुष्ठानों को बिना किसी व्यवधान के सफलतापूर्वक पूरा कर दिखाया। तकनीक का यह अनूठा और आधुनिक प्रयोग इस कठिन परिस्थिति में महिलाओं के लिए बेहद मददगार साबित हुआ और सभी ने अपनी धार्मिक परंपराओं को निभाते हुए इस विशेष पर्व को पूर्णता प्रदान की।
पारंपरिक विधि से टूटा व्रत
वाराणसी में हुई इस मौसमी घटना ने करवाचौथ के पारंपरिक पर्व पर एक अलग ही प्रकार का अनूठा प्रभाव डाला जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। पिछले दो दिनों से मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ था और शाम की चांदनी अचानक गायब हो जाने से सभी लोग हैरान थे। चक्रवाती तूफान अर्नब के कारण उत्पन्न हुई इस बाधा ने उत्सव के रंग में थोड़ा खलल जरूर डाला लेकिन महिलाओं का उत्साह कम नहीं हुआ। परिवार के वरिष्ठ सदस्यों और ज्योतिषियों के मार्गदर्शन से व्रती महिलाओं को इस संकट से उबरने में बहुत बड़ी सहायता प्राप्त हुई। पारंपरिक पूजन पद्धति का पालन करते हुए महिलाओं ने अपनी पूजा को समय पर पूरा किया और व्रत तोड़ने की आवश्यक धार्मिक रस्मों को निभाया। टेक्नोलॉजी के इस दौर में मोबाइल फोन का यह उपयोग करवाचौथ के इतिहास में एक नया उदाहरण बन गया जब बादलों की ओट में चांद छिप गया था। सुहागिन महिलाओं ने अपने पतियों की दीर्घायु और अटूट प्रेम के बंधन की कामना करते हुए अपने कठिन उपवास को जल ग्रहण कर विधिवत रूप से समाप्त किया। मौसम की इस चुनौती ने यह साबित कर दिया कि गहरी आस्था और आपसी सहयोग के आगे प्राकृतिक बाधाएं भी ज्यादा देर तक टिक नहीं पाती हैं। प्रशासन और मौसम विभाग की पूर्व सूचनाओं के अनुरूप चक्रवाती तूफान का यह असर शहर के इस विशेष पर्व पर पूरी तरह से हावी नजर आया।