तापमान में भारी गिरावट और लगातार बारिश का दौर
पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहर में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है क्योंकि पहाड़ियों पर हो रही वर्षा और समुद्री तट से आ रही नमी का प्रभाव यहां साफ महसूस किया जा रहा है। सप्ताह के तीसरे दिन सुबह की शुरुआत के साथ ही बादलों ने पानी बरसाना शुरू कर दिया था और यह सिलसिला पूरे दिन रुक-रुककर चलता रहा। इस मानसूनी जैसी गतिविधि के कारण अधिकतम पारे में करीब आठ डिग्री सेल्सियस की भारी कमी दर्ज की गई है। बीते दिन मंगलवार को अधिकतम पारा जहां 32.8 डिग्री सेल्सियस पर रिकॉर्ड किया गया था, वहीं मौसम के इस अचानक बदलाव के चलते बुधवार को यह लुढ़ककर सीधे 24.5 डिग्री सेल्सियस के स्तर पर आ गया। अक्टूबर महीने के दौरान सामान्य तौर पर अधिकतम औसत तापमान 33 डिग्री के आसपास बना रहता है, जिसके मुकाबले यह गिरावट काफी बड़ी मानी जा रही है। दिन और रात के तापमान के बीच का अंतर भी इस मौसमी बदलाव की वजह से काफी कम हो गया है। ठंडी हवाओं के चलने से स्थानीय नागरिकों को अब कड़ाके की सर्दी का अहसास सताने लगा है और लोग गर्म कपड़ों का इस्तेमाल करने लगे हैं।
सड़क से लेकर रेल और बिजली व्यवस्था पर असर
लगातार पानी बरसने के कारण शहरी इलाकों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त नजर आया। शहर की सड़कों पर पानी भर जाने के कारण यातायात की रफ्तार धीमी पड़ गई और लोगों की आवाजाही में भारी रुकावट आई। दशाश्वमेध, गोदौलिया, मैदागिन और लक्सा जैसे व्यस्त क्षेत्रों की सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई जिससे नालियों का गंदा पानी भी रास्तों पर फैल गया। छाता लेकर बाहर निकले राहगीरों और वाहन चालकों के साथ-साथ दफ्तर जाने वाले कामगारों और स्कूल जाने वाले बच्चों को भी काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। इस दौरान तेज हवाओं और पानी के कारण बिजली आपूर्ति भी बुरी तरह बाधित हुई और कई क्षेत्रों में चार से छह घंटे तक बिजली पूरी तरह गुल रही। विद्युत निगम की टीमों को विभिन्न स्थानों पर आई तकनीकी खराबियों को दूर करने के लिए लगाया गया ताकि आपूर्ति बहाल की जा सके। खराब मौसम का बुरा असर रेल परिचालन पर भी पड़ा जिसके चलते नई दिल्ली से आने वाली स्पेशल ट्रेन समेत कई गाड़ियां अपने निर्धारित समय से काफी विलंब से पहुंचीं। चक्रवाती चेतावनी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने नाविकों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर गंगा नदी में छोटी नावों के संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
किसानों की चिंताएं और आने वाले दिनों का अनुमान
अचानक हुई इस बेमौसम बारिश ने एक तरफ जहां लोगों को गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ अन्नदाता किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। कृषि जानकारों का मानना है कि इस देर से हुई वर्षा के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है। कई क्षेत्रों में खेतों के अंदर पानी भर जाने के कारण फसल प्रभावित हुई है और तेज हवाओं के झोंकों से धान के पौधे जमीन पर गिर भी गए हैं। जिन किसानों की फसलें पकने के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी थीं, उनके चेहरों पर नुकसान की चिंता साफ देखी जा सकती है। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले आगामी दिनों में भी मौसम का यह मिजाज इसी प्रकार बने रहने की पूरी संभावना है। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में ही सर्दी के जल्दी दस्तक देने से आम जनजीवन की दिनचर्या में बदलाव आ गया है। रेलवे और स्थानीय प्रशासन ने भी यात्रियों तथा नाविकों को खराब मौसम को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। घरों और दुकानों के अंदर पानी घुस जाने से लोगों का दैनिक कामकाज भी काफी हद तक प्रभावित हुआ है और प्रशासनिक टीमें स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।