आने वाले दिनों में बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी
राजस्थान के मौसम तंत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है जिसके चलते कई इलाकों में हल्की से मध्यम दर्जे की वर्षा होने की पूरी संभावना है। मौसम विभाग के जानकारों के अनुसार इस मौसमी हलचल का असर राज्य के भीतर 31 अक्टूबर तक लगातार बना रहेगा। इस दौरान कुछ स्थानों पर हवाएं तीस से चालीस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती हैं। बंगाल की खाड़ी की तरफ से उत्पन्न हुआ एक शक्तिशाली समुद्री चक्रवात अब तेजी से राज्य की भौगोलिक सीमा की तरफ अग्रसर हो रहा है। इस खतरनाक चक्रवाती तूफान के कारण राज्य के पच्चीस से अधिक जिलों में आगामी तीन दिनों तक वर्षा होने की आशंका जताई गई है। लगातार चल रही हवाओं और बादलों की आवाजाही के कारण तापमान में काफी तेजी से गिरावट आने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार इस चक्रवात का प्रभाव आगामी महीने की शुरुआत से पहले तक समाप्त नहीं होगा और तब तक मौसम का मिजाज इसी प्रकार बदला हुआ नजर आएगा।
तापमान में भारी गिरावट और सबसे ठंडी रात का रिकॉर्ड
पिछले चौबीस घंटों के दौरान धूप की तीव्रता कम होने की वजह से दिन के तापमान में दो डिग्री सेल्सियस तक की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। केवल दिन ही नहीं बल्कि रात के समय भी पारे में लगातार गिरावट होने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। मंगलवार के रोज राज्य के अधिकांश प्रमुख शहरों में न्यूनतम तापमान में अच्छी खासी गिरावट महसूस की गई। सीकर, कोटा, अजमेर और टोंक जैसे जिलों में न्यूनतम पारे में तीन डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट रिकॉर्ड की गई है। इस दौरान सीकर शहर में सबसे ठंडी रात दर्ज की गई जहां न्यूनतम तापमान गिरकर बारह दशमलव दो डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसके अलावा प्रसिद्ध पर्यटक स्थल माउंट आबू में न्यूनतम तापमान तेरह दशमलव छह डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जयपुर के मौसम निदेशक ने स्पष्ट किया है कि इस नए मौसमी तंत्र का प्रभाव राज्य के बड़े हिस्से पर साफ देखा जा रहा है जिससे आम जनजीवन पर भी ठंड का असर बढ़ने लगा है।
पिछली आपदाओं की याद और ठंड बढ़ने की पूरी संभावना
राज्य की ओर बढ़ रहे इस चक्रवाती तूफान ने तीन साल पहले आई बिपरजॉय चक्रवात की तबाही की यादें ताजा कर दी हैं जिसने उस समय आठ लोगों की जान ली थी और काफी नुकसान पहुंचाया था। वर्तमान में आगे बढ़ रहे इस चक्रवाती तूफान से निपटने और लोगों को सतर्क करने के लिए संबंधित अधिकारी पूरी स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। लगातार हो रही वर्षा और तेज हवाओं के थपेड़ों के कारण दिन के साथ-साथ रात के तापमान में भी भारी कमी आने की आशंका बनी हुई है। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यह पूरा मौसमी सिस्टम इकतीस अक्टूबर तक पूरी तरह सक्रिय रहेगा और अपना असर दिखाता रहेगा। इस चक्रवाती प्रभाव के पूरी तरह थमने के बाद नवंबर महीने के पहले सप्ताह से ठंड में और अधिक इजाफा होने का अनुमान लगाया गया है। आम नागरिकों को गिरते तापमान और तेज हवाओं के मद्देनजर पूरी तरह सतर्क रहने की सलाह दी गई है ताकि किसी भी संभावित असुविधा से बचा जा सके।