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मौसम विभाग की चेतावनी: उत्तराखंड के तीन जिलों में बादल फटने से भारी तबाही, राहत और बचाव कार्य जारी

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में प्रकृति का कहर एक बार फिर देखने को मिला है। पिथौरागढ़, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में रात के समय अचानक हुए बादल फटने के कारण भारी तबाही मची है, जिससे कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

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Kantap News डेस्क
18 अग 2026, 14:19
मौसम विभाग की चेतावनी: उत्तराखंड के तीन जिलों में बादल फटने से भारी तबाही, राहत और बचाव कार्य जारी
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानसूनी बादलों के अचानक सक्रिय होने से पिथौरागढ़ और चमोली जिलों के दूरदराज के गांवों में भारी तबाही की खबर सामने आ रही है। स्थानीय प्रशासन से प्राप्त प्रारंभिक जानकारियों के अनुसार, बीती रात अचानक आसमान से आफत बनकर बरसे बादलों के कारण कई नदियां और नाले उफान पर आ गए। इस अप्रत्याशित आपदा की वजह से कई कच्चे मकान और गौशालाएं पानी के तेज बहाव में बह गईं, जिससे मवेशियों के हताहत होने की भी सूचना मिल रही है। राज्य के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने तुरंत संज्ञान लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत दल रवाना कर दिए हैं। मुख्य मार्ग अवरुद्ध होने के कारण बचाव कर्मियों को मौके पर पहुंचने में शुरुआती कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन युद्धस्तर पर मलबा हटाने का काम जारी है ताकि घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

राज्य सरकार द्वारा आपातकालीन बैठक और सहायता का ऐलान

घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने राजधानी देहरादून में एक उच्च स्तरीय आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और आपदा प्रबंधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए और उनके लिए भोजन, पानी तथा चिकित्सा शिविरों की व्यवस्था तुरंत सुनिश्चित की जाए। सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी ऐलान किया है। इसके अलावा, जिन लोगों के घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर नए आवास उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया है। मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटों के दौरान भी राज्य के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसके चलते सभी जिलाधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

राहत कार्यों में सेना और एनडीआरएफ की तैनाती

स्थिति की नज़ाकत को भांपते हुए केंद्र सरकार ने भी दखल दिया है और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ की तीन अतिरिक्त टीमों को वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों में उतार दिया है। भारतीय सेना के जवान भी स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर फंसे हुए पर्यटकों और ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने के अभियान में जुट गए हैं। पिथौरागढ़ के सुदूरवर्ती गांवों में अभी भी कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है, जिनकी तलाश के लिए खोजी कुत्तों और आधुनिक जीवन-रक्षक उपकरणों की मदद ली जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने भी मोबाइल मेडिकल यूनिट्स को मौके पर तैनात कर दिया है ताकि जलजनित बीमारियों के प्रकोप को रोका जा सके। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे अगले कुछ दिनों तक अनावश्यक यात्रा करने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।
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