Lucknow Desk : राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा प्रकरण को लेकर पूर्व आईपीएस अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता अमिताभ ठाकुर ने जांच का दायरा बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने इस मामले में SIT को पत्र भेजकर कहा है कि जांच केवल आरोपित लोगों की भूमिका तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरी व्यवस्था और उससे जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच होनी चाहिए। अमिताभ ठाकुर ने मांग की है कि यह साफ किया जाए कि मंदिर में कुल कितना चढ़ावा मिलने की उम्मीद थी, वास्तव में कितना चढ़ावा प्राप्त हुआ और कितनी रकम का हिसाब नहीं मिल रहा है। इसके लिए दान-पेटियों, रसीदों, चढ़ावे की गिनती और बैंक में जमा की गई रकम का आपस में मिलान करने की बात कही गई है।
उन्होंने जांच में CCTV फुटेज, दान की रकम की अभिरक्षा, लेखा-बही और अंतिम खातों को भी शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है कि इन सभी रिकॉर्ड का मिलान होने से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि रकम के संग्रह से लेकर बैंक में जमा होने तक पूरी प्रक्रिया में कहीं कोई गड़बड़ी हुई या नहीं। अमिताभ ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट से जुड़े फोरेंसिक ऑडिटर की मदद से वित्तीय जांच कराने का सुझाव भी दिया है। उनका कहना है कि Donation Reconciliation के जरिए चढ़ावे की पूरी वित्तीय स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
उनके अनुसार, जांच में केवल किसी व्यक्ति की गलती या कथित अनियमितता सामने लाना पर्याप्त नहीं होगा। मंदिर की व्यवस्था में मौजूद कमियों का वित्तीय असर भी देखा जाना चाहिए। इससे यह पता चल सकेगा कि कहीं व्यवस्थागत खामियों के कारण चढ़ावे की रकम के हिसाब-किताब में अंतर तो नहीं आया। अमिताभ ठाकुर ने उम्मीद जताई है कि SIT मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कर पूरे वित्तीय रिकॉर्ड को सामने लाएगी।