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राजनीति

महाराष्ट्र की सियासत में नया मोड़: सीएम को मंत्रियों के फैसले पलटने की मिली अतिरिक्त शक्ति, एनडीए सहयोगियों में बढ़ी चिंता

महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार के भीतर आंतरिक कलह के संकेत मिलने लगे हैं। मुख्यमंत्री को मंत्रियों के निर्णयों को दरकिनार करने या पलटने की विशेष शक्तियां दिए जाने के बाद एनडीए के भीतर चिंता की लहर दौड़ गई है।

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Ankit Yadav
20 अग 2026, 11:25
महाराष्ट्र की सियासत में नया मोड़: सीएम को मंत्रियों के फैसले पलटने की मिली अतिरिक्त शक्ति, एनडीए सहयोगियों में बढ़ी चिंता
महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई जब राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री के अधिकारों में उल्लेखनीय वृद्धि कर दी। इस नए प्रावधान के तहत अब मुख्यमंत्री को लोक कल्याण और प्रशासनिक हित का हवाला देते हुए राज्य मंत्रिमंडल के अन्य मंत्रियों द्वारा लिए गए किसी भी फैसले को पलटने या उसमें संशोधन करने की पूर्ण शक्ति मिल गई है। सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से शासन में गति आएगी और महत्वपूर्ण विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी से बचा जा सकेगा। हालांकि, इस कदम ने राज्य सरकार में शामिल एनडीए के सहयोगी दलों की नींद उड़ा दी है। सहयोगियों का मानना है कि इस प्रकार की अत्यधिक केंद्रीकृत शक्तियां गठबंधन धर्म की मूल भावना के विपरीत हैं और इससे मंत्रिमंडल में आपसी अविश्वास की भावना पैदा हो सकती है, जिससे लंबे समय में सरकार की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

सहयोगी दलों की आपत्तियां और आंतरिक असंतोष

इस नए बदलाव के सामने आने के बाद से ही विभिन्न सहयोगी दलों के नेता अंदरखाने अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि उनके विभागों द्वारा लिए गए नीतिगत निर्णयों को इस तरह से बदला जाने लगा, तो उनके मंत्रियों की जनता के बीच स्थिति कमजोर होगी और वे अपने चुनावी वादों को पूरा करने में असमर्थ महसूस करेंगे। कई वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे पर बंद कमरे में बैठकें शुरू कर दी हैं और इसे मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा शक्तियों के केंद्रीयकरण के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने भी इस स्थिति पर तंज कसते हुए कहा है कि यह गठबंधन सरकार आपसी खींचतान और आंतरिक अविश्वास के बोझ तले खुद ही बिखर जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के कदम अक्सर गठबंधन सरकारों में बड़े टकराव का कारण बनते हैं, क्योंकि हर सहयोगी दल अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की फिराक में रहता है।

सरकार की स्थिरता पर मंडराते सवाल

इन तमाम राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि इन शक्तियों का उपयोग केवल असाधारण परिस्थितियों में और राज्यहित को सर्वोपरि रखते हुए ही किया जाएगा। इसके बावजूद, सहयोगी दलों के भीतर फैली आशंकाओं को पूरी तरह से दूर नहीं किया जा सका है। आने वाले सत्रों और मंत्रिमंडल की बैठकों में इस बात पर तीखी बहस होने की पूरी संभावना है कि इन अधिकारों की सीमा क्या होगी। महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय जो अस्थिरता के बादल मंडरा रहे हैं, वे आने वाले विधानसभा चुनावों या आगामी राजनीतिक निर्णयों पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
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