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राजस्व को तगड़ा झटका: केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर खनन कानून संशोधन पर जताई गहरी चिंता

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन ने संसद में पारित खान और खनिज संशोधन विधेयक के प्रावधानों पर गंभीर आपत्ति जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है।

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Kantap News डेस्क
19 अग 2026, 12:05
राजस्व को तगड़ा झटका: केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर खनन कानून संशोधन पर जताई गहरी चिंता
दक्षिण भारतीय राज्य केरल के प्रशासनिक मुखिया ने केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए खनन कानूनों में बदलावों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। संसद के पिछले सत्र के दौरान पारित किए गए माइंस एंड मिनरल्स अमेंडमेंट बिल के कुछ प्रावधानों से राज्य के खजाने को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। इसी सिलसिले में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने और इन प्रावधानों की नए सिरे से समीक्षा करने का औपचारिक अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री का तर्क है कि यदि इन संशोधनों को इसी रूप में लागू किया गया, तो इससे संघीय ढांचे और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

राज्यों के वित्तीय अधिकारों पर असर

नवीनतम विधायी संशोधनों के तहत खनिज पदार्थों के उत्खनन और उससे जुड़े राजस्व संग्रह के अधिकारों में बड़े बदलाव किए गए हैं। राज्य सरकार का मुख्य कंसर्न यह है कि इन नए नियमों के लागू होने से स्थानीय निकायों और राज्य के खजाने में आने वाले रॉयल्टी तथा अन्य शुल्कों में भारी कमी आएगी। केरल जैसे राज्य, जो अपने विकास कार्यों के लिए आंतरिक राजस्व पर काफी हद तक निर्भर हैं, उनके लिए इस तरह की वित्तीय कटौती से कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। शासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि केंद्र और राज्यों के बीच इस मामले पर विस्तृत विचार-विमर्श होना चाहिए था ताकि किसी भी पक्ष को अवांछित आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।

केंद्र से हस्तक्षेप की पुरजोर मांग

प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि देश के संघीय स्वरूप को मजबूत बनाए रखने के लिए राज्यों के हितों की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक है। राज्य नेतृत्व ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह सभी संबंधित पक्षों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित करे और खनन कानूनों के उन विशिष्ट बिंदुओं में संशोधन करे जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय स्तर पर इस अपील का क्या जवाब मिलता है और क्या राज्यों की वित्तीय चिंताओं का कोई माकूल समाधान निकाला जाता है।
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