कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
नेपाल पुलिस का अलर्ट - तिब्बत की तरफ़ बना डैम टूटा, लोगों से सुरक्षित जगह पर जाने को कहा      Raksha Bandhan 2026 Shubh Muhurat LIVE: खत्म हुआ राहुकाल! फिर शुरू हुआ राखी का शुभ मुहूर्त, जानिए कब तक बां      धोखाधड़ी, उत्पीड़न और फिर मर्डर; दिल्ली की मॉडल हत्या मामले में 'जहरीले रिश्ते' का खुलासा      ज़ोहरान ममदानी को लेकर प्रवासी भारतीयों में बहस, आरएसएस ने जारी किया ये बयान      आज लोकसभा चुनाव हुए तो BJP को मिलेंगी कितनी सीटें, इंडिया गठबंधन में शामिल दलों का कैसा हाल, C-वोटर का आया सर्वे      पाकिस्तान ने फंसाया एक और ‘मुर्गा’, सऊदी अरब-तुर्की के बाद इस देश के साथ मिलिट्री डील, बदले में क्या मिलेगा...      रिजिजू ने दिए संसद का विशेष सत्र बुलाने के संकेत, परिसीमन बिल पर टिकीं निगाहें; विपक्ष में हलचल      दिल्ली आ गई 'कांदा एक्सप्रेस', 60-70 रुपये वाला प्याज अब 35 रुपये किलो, जानिए कहां मिलेगा?     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹ | SILVER (10g) ₹ | USD/INR ₹ | CRUDE OIL $ | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
राजनीति

राजस्व को तगड़ा झटका: केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर खनन कानून संशोधन पर जताई गहरी चिंता

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन ने संसद में पारित खान और खनिज संशोधन विधेयक के प्रावधानों पर गंभीर आपत्ति जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है।

X
Kantap News डेस्क
19 अग 2026, 12:05
राजस्व को तगड़ा झटका: केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर खनन कानून संशोधन पर जताई गहरी चिंता
दक्षिण भारतीय राज्य केरल के प्रशासनिक मुखिया ने केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए खनन कानूनों में बदलावों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। संसद के पिछले सत्र के दौरान पारित किए गए माइंस एंड मिनरल्स अमेंडमेंट बिल के कुछ प्रावधानों से राज्य के खजाने को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। इसी सिलसिले में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने और इन प्रावधानों की नए सिरे से समीक्षा करने का औपचारिक अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री का तर्क है कि यदि इन संशोधनों को इसी रूप में लागू किया गया, तो इससे संघीय ढांचे और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

राज्यों के वित्तीय अधिकारों पर असर

नवीनतम विधायी संशोधनों के तहत खनिज पदार्थों के उत्खनन और उससे जुड़े राजस्व संग्रह के अधिकारों में बड़े बदलाव किए गए हैं। राज्य सरकार का मुख्य कंसर्न यह है कि इन नए नियमों के लागू होने से स्थानीय निकायों और राज्य के खजाने में आने वाले रॉयल्टी तथा अन्य शुल्कों में भारी कमी आएगी। केरल जैसे राज्य, जो अपने विकास कार्यों के लिए आंतरिक राजस्व पर काफी हद तक निर्भर हैं, उनके लिए इस तरह की वित्तीय कटौती से कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। शासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि केंद्र और राज्यों के बीच इस मामले पर विस्तृत विचार-विमर्श होना चाहिए था ताकि किसी भी पक्ष को अवांछित आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।

केंद्र से हस्तक्षेप की पुरजोर मांग

प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि देश के संघीय स्वरूप को मजबूत बनाए रखने के लिए राज्यों के हितों की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक है। राज्य नेतृत्व ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह सभी संबंधित पक्षों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित करे और खनन कानूनों के उन विशिष्ट बिंदुओं में संशोधन करे जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय स्तर पर इस अपील का क्या जवाब मिलता है और क्या राज्यों की वित्तीय चिंताओं का कोई माकूल समाधान निकाला जाता है।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज