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राजनीति

संसद में ऐतिहासिक प्रस्ताव: तमिलनाडु विधानसभा ने लोकसभा सीटें 543 पर स्थिर रखने और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का किया समर्थन

तमिलनाडु विधानसभा ने एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से मांग की है कि आगामी परिसीमन के बावजूद लोकसभा सीटों की संख्या 543 पर ही बरकरार रखी जाए।

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Kantap News डेस्क
13 अग 2026, 14:35
संसद में ऐतिहासिक प्रस्ताव: तमिलनाडु विधानसभा ने लोकसभा सीटें 543 पर स्थिर रखने और 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का किया समर्थन
दक्षिण भारत के राजनीतिक पटल पर एक बड़ा कदम उठाते हुए तमिलनाडु विधानसभा ने केंद्र सरकार के नाम एक विशेष प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव के तहत यह पुरजोर मांग की गई है कि भविष्य के परिसीमन के दौरान राज्यों के बीच सीटों के संतुलन को बनाए रखने के लिए लोकसभा की कुल सदस्य संख्या को 543 पर ही स्थायी रूप से स्थिर रखा जाना चाहिए। इसके साथ ही सदन ने साल 2029 के आम चुनावों से ही महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को बिना किसी देरी के लागू करने का भी जोरदार समर्थन किया है, जिससे देश भर की राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है।

संघीय ढांचे और प्रतिनिधित्व पर चर्चा

इस प्रस्ताव के पीछे मुख्य चिंता यह है कि जनसंख्या नियंत्रण के नियमों का ईमानदारी से पालन करने वाले दक्षिणी राज्यों को भविष्य में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में किसी प्रकार का नुकसान न उठाना पड़े। सत्ताधारी दल और विभिन्न क्षेत्रीय दलों का मानना है कि यदि जनसंख्या के आधार पर सीटें बढ़ाई गईं, तो बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों की आवाज कमजोर हो सकती है। इसलिए, सीटों के मौजूदा आंकड़े को फ्रीज करना और महिला प्रतिनिधित्व को अनिवार्य बनाना देश के संघीय ढांचे की मजबूती के लिए बेहद जरूरी कदम बताया गया है।

राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक प्रभाव

तमिलनाडु विधानसभा के इस कदम ने अन्य राज्यों के राजनेताओं और नीति निर्माताओं का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है। राष्ट्रीय दलों के लिए अब इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करना अनिवार्य हो गया है, क्योंकि महिला आरक्षण और परिसीमन का यह मामला सीधे तौर पर देश के आगामी चुनावी परिदृश्य को प्रभावित करेगा। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि संसद के आगामी सत्रों में इस प्रस्ताव पर व्यापक चर्चा देखने को मिल सकती है, जिससे देश की चुनावी प्रणाली में दूरगामी बदलाव आ सकते हैं।
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