भारत मंडपम में भव्य आयोजन का शुभारंभ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक चलने वाले इस त्रिदिवसीय समारोह की शुरुआत करेंगे। वह शुक्रवार को सुबह 11 बजे नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम पहुंचकर इस भव्य आयोजन का उद्घाटन करेंगे और वहां उपस्थित जनसमूह को संबोधित भी करेंगे। इस विशेष तीन दिवसीय महाकुंभ में विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी लोग भाग लेने पहुंचेंगे। आयोजन समिति से जुड़े आंकड़ों के अनुसार इस कार्यक्रम में नौ हजार से अधिक व्यक्तियों की भागीदारी तय की गई है। यह आयोजन एक बड़े आध्यात्मिक संस्थान के पचहत्तर वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित साल भर चलने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला का अंतिम चरण है। संस्थान के संस्थापक ने इस मिशन की स्थापना बहुत पहले की थी ताकि प्राचीन ग्रंथों का ज्ञान सुलभ हो सके।
सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का ब्यौरा
इस साल भर के उत्सव के दौरान देश और दुनिया भर में कई तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान आयोजित किए गए हैं। पिछले वर्ष इस विशेष उत्सव की औपचारिक शुरुआत के समय प्रधानमंत्री ने तमिल भाषा में रचित भगवद् गीता को जारी किया था जिसके संगीत निर्देशन का कार्य एक प्रसिद्ध संगीतकार ने किया था। इस लंबी श्रृंखला के अंतर्गत देश के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर हवन का आयोजन किया गया। इसके अलावा पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में एक नए मंदिर की स्थापना की गई जिसे मां सौंदर्या चिन्मयी नाम दिया गया है। डिजिटल माध्यम से भी कई बड़े धार्मिक आयोजन संपन्न हुए जिनमें एक ऑनलाइन पाठ के दौरान दुनिया के अलग-अलग कोनों से एक लाख से ज्यादा लोगों ने एक साथ पवित्र ग्रंथ के पंद्रहवें अध्याय का सस्वर पाठ किया। गीता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए एक विशेष कार्यक्रम भी चलाया गया जिसमें पंद्रह युवाओं ने पूरे देश में चालीस हजार किलोमीटर से अधिक लंबी दूरी की यात्रा पूरी की।
संस्थान की स्थापना और समसामयिक बयान
इस आध्यात्मिक मिशन की स्थापना वर्ष 1951 में स्वामी चिन्मयानंद द्वारा की गई थी। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य भगवद् गीता और वेदों के प्राचीन ज्ञान को समाज के हर वर्ग के आम लोगों तक बहुत सरलता से पहुँचाना रहा है। पचहत्तर वर्षों की इस लंबी यात्रा में संस्था ने देश और दुनिया में आध्यात्मिक चेतना जगाने का कार्य किया है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री ने एक अन्य प्रसंग में राजनीतिक विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ जहाँ पूरी दुनिया एक नए वैश्विक क्रम की तलाश में जुटी हुई है वहीं कुछ लोग देश के भीतर अव्यवस्था पैदा करने के सपने देख रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी अपने किसी असफल उत्पाद को दोबारा जनता के सामने लॉन्च करने के लिए कब तक पूरे देश को दांव पर लगाती रहेगी। इन सभी कार्यक्रमों और बयानों के बीच प्रधानमंत्री का यह दिल्ली दौरा आध्यात्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।