अंडमान की संभावित सूची में नए स्थल शामिल
भारतीय भूभाग के अंतर्गत आने वाले कई अनूठे क्षेत्रों को लेकर एक बड़ी बात सामने आई है। अभी ये सभी क्षेत्र आधिकारिक रूप से यूनेस्को की मुख्य विश्व धरोहरों की नामावली में नहीं जोड़े गए हैं। इन्हें फिलहाल संभावित सूची में जगह दी गई है और भविष्य में इनके मुख्य सूची में आने की उम्मीद जताई जा रही है। इन चुनिंदा जगहों में अंडमान का बाराटांग द्वीप भी प्रमुख रूप से शामिल है। यह स्थान अपने सुरम्य समुद्री तटों के बजाय अन्य प्राकृतिक विशेषताओं के लिए अपनी एक अलग पहचान रखता है। यहां पानी में चूना पत्थर के घुलने की लंबी प्रक्रिया के कारण अद्भुत गुफाओं का निर्माण हुआ है। इसके अलावा, इस भूभाग पर जमीन के नीचे से कीचड़, पानी और गैस बाहर उगलने वाले अनोखे ज्वालामुखी भी पाए जाते हैं। इन प्राकृतिक संरचनाओं को देखने के लिए विभिन्न क्षेत्रों से सैलानी यहां पहुंचते हैं और इनकी भौगोलिक बनावट वैज्ञानिकों के लिए भी अध्ययन का एक बहुत बड़ा विषय बनी हुई है।
बैरन और नारकोंडम की अनूठी भौगोलिक विशेषताएं
यूनेस्को की संभावित सूची में अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के बैरन द्वीप और नारकोंडम द्वीप का नाम भी दर्ज किया गया है। इन दोनों द्वीपों की अपनी अलग और बेहद खास भौगोलिक विशेषताएं हैं जो इन्हें पूरी दुनिया में विशिष्ट बनाती हैं। बैरन द्वीप पर देश का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी मौजूद होने का गौरव प्राप्त है। इस सक्रिय ज्वालामुखी के भीतर वर्ष 1787 के बाद से ही समय-समय पर हलचल दर्ज होती रही है। हाल ही में वर्ष 2025 तथा वर्ष 2026 की शुरुआत में भी इस ज्वालामुखी के अंदर आंतरिक गतिविधियां देखी गई थीं। दूसरी ओर, नारकोंडम द्वीप पूरी तरह से हरे-भरे जंगलों के आवरण से घिरा हुआ एक ज्वालामुखी द्वीप है। इस विशेष द्वीप पर नारकोंडम हॉर्नबिल नाम के दुर्लभ पक्षी निवास करते हैं। यह पक्षी प्रजाति इस पृथ्वी पर केवल इसी एकमात्र स्थान पर पाई जाती है जिसके कारण इसका जैव विविधता संरक्षण की दृष्टि से बहुत अधिक महत्व है। इस क्षेत्र के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए यहां पर्यटकों के आने-जाने पर प्रशासन द्वारा काफी कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं ताकि वन्य जीवन को कोई नुकसान न पहुंचे।
सिरपुर के मंदिर और भावी वैश्विक संभावनाएं
देश के भीतर मौजूद इन अनूठी प्राकृतिक और ऐतिहासिक जगहों का चयन संभावित सूची में होना राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है। सिरपुर के प्राचीन मंदिरों के साथ-साथ अंडमान के ये सभी विशिष्ट द्वीप अपनी अनूठी विशेषताओं के कारण लगातार चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। आम पाठकों और देशवासियों के लिए यह जानना बहुत आवश्यक है कि ये सभी स्थल अभी केवल शुरुआती संभावित सूची का हिस्सा हैं। अधिकारियों और विशेषज्ञों को यह पूरी उम्मीद है कि आगे चलकर इन सभी क्षेत्रों को यूनेस्को की मुख्य विश्व धरोहर की सूची में आधिकारिक रूप से स्थान मिल जाएगा। ऐसा होने पर इन क्षेत्रों के संरक्षण और संवर्धन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष सहायता और ध्यान मिलने की संभावना बढ़ जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया से देश के पर्यटन मानचित्र पर इन जगहों का महत्व और अधिक बढ़ जाएगा तथा वैश्विक स्तर पर भारतीय धरोहरों की पहुंच भी सुदृढ़ होगी।