यूरोपीय अकादमी में चयन की प्रक्रिया और उपलब्धि
यूरोपीय विज्ञान और कला अकादमी के पूर्ण सदस्य का पद हासिल करना किसी भी शोधकर्ता के लिए एक बेहद कठिन और लंबी चुनौती माना जाता है। इस प्रतिष्ठित संगठन में जगह बनाने के इच्छुक हर उम्मीदवार को अनिवार्य रूप से तीन अलग-अलग चरणों से गुजरना पड़ता है। सबसे पहले नामांकन की प्रक्रिया पूरी होती है, जिसके बाद मूल्यांकन का दौर आता है और अंत में अनुमोदन की मुहर लगती है। नियमों के मुताबिक, आवेदक का नाम संगठन के किसी वैध सदस्य द्वारा प्रस्तावित किया जाना जरूरी होता है या फिर राष्ट्रीय प्रतिनिधि परिषद के जरिए उनका परिचय कराया जाता है। इसके पश्चात एक विशेष आयोग वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में किए गए कार्यों, छपे हुए लेखों और समाज के प्रति योगदान का बारीकी से अध्ययन करता है। इस पूरी छानबीन के बाद संगठन की सीनेट अंतिम दौर का मतदान करती है। ऑस्ट्रिया के साल्ज़बर्ग शहर में 1990 के दौरान स्थापित यह अकादमिक संस्था एक अंतःविषयक मंच है। यह संगठन दुनिया भर के बुद्धिजीवियों, वैज्ञानिकों और कला जगत के जानकारों को एक छत के नीचे जोड़ता है। इसके दायरे में प्राकृतिक विज्ञान, इंजीनियरिंग और चिकित्सा के साथ ही सामाजिक विज्ञान, मानविकी तथा कला जैसे तमाम महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं, जो विभिन्न देशों के बीच शैक्षणिक संवाद और आपसी सहयोग को बढ़ाने का काम करते हैं।
प्रोफेसर गुयेन न्गोक थान्ह का अकादमिक सफर और कार्य
इस प्रतिष्ठित अकादमी में चुने गए प्रोफेसर गुयेन न्गोक थान्ह का जन्म 1963 में क्वांग ट्राच क्षेत्र में हुआ था, जो अब क्वांग त्रि प्रांत के अंतर्गत आता है। उन्होंने अपने शुरुआती दिनों में ह्यू नेशनल हाई स्कूल से गणित विषय की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद 1979 में वे उच्च शिक्षा के लिए पोलैंड चले गए और वहीं अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखी। आगे चलकर उन्होंने 1989 में अपनी डॉक्टरेट की थीसिस का सफलतापूर्वक बचाव किया और 2006 में पोलैंड के भीतर प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किए गए। इसके तीन साल बाद यानी 2009 में वे पोलैंड के भीतर स्टेट प्रोफेसर की उपाधि पाने वाले पहले वियतनामी नागरिक बने। इसके बाद 2011 के दौरान उन्हें उनके गृह देश वियतनाम में भी प्रोफेसर के रूप में विशेष पहचान से सम्मानित किया गया। उनके शोध कार्यों का दायरा बहुत व्यापक रहा है और उन्होंने अपने करियर के दौरान 450 से ज्यादा वैज्ञानिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं। उनके मुख्य अध्ययन विषयों में कम्प्यूटेशनल सामूहिक बुद्धिमत्ता शामिल है, जिसमें विभिन्न एजेंट और प्रणालियां मिलकर आम समस्याओं का समाधान ढूंढती हैं। यह शोध दिशा बुद्धिमान प्रणालियों को विकसित करने और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में सहायता प्रदान करती है। टोन डुक थांग विश्वविद्यालय के दस्तावेजों के अनुसार, उन्होंने कुल 46 पुस्तकों का लेखन भी किया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योगदान और शोध पत्रिकाओं का संपादन
अपने लंबे अकादमिक करियर के दौरान प्रोफेसर गुयेन न्गोक थान्ह ने कई बड़ी जिम्मेदारियां निभाई हैं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वियतनाम का नाम रोशन किया है। वर्ष 2023 के दौरान उन्हें 2024 से 2027 के कार्यकाल के लिए पोलिश काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एक्सीलेंस में दोबारा चुना गया था। उस चुनाव के परिणाम 6 अक्टूबर 2023 को सार्वजनिक किए गए थे, जिसमें हजारों की संख्या में डॉक्टरेट डिग्री धारक वैज्ञानिकों ने ऑनलाइन मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। उस समय वे व्रोकला प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से जुड़े हुए थे और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उन्हें भारी संख्या में वोट मिले थे। उन्होंने इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स की संस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी तकनीकी समिति के अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान समय में वे टोन डुक थांग विश्वविद्यालय से प्रकाशित होने वाली जर्नल ऑफ इंफॉर्मेशन एंड टेलीकम्युनिकेशन के प्रधान संपादक की भूमिका निभा रहे हैं। यह शोध पत्रिका वेब ऑफ साइंस और स्कोपस जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर सूचीबद्ध है। विश्वविद्यालय द्वारा अक्टूबर 2026 में साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस पत्रिका का साइटस्कोर लगातार बेहतर हो रहा है और यह स्कोपस के मानकों के अनुसार शीर्ष क्यू-वन समूह में शामिल होने की स्थिति में पहुंच चुकी है।