लूला दा सिल्वा की शानदार चुनावी वापसी
ब्राज़ील में हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में 80 वर्षीय लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने निर्णायक बढ़त हासिल करते हुए जीत दर्ज की है। वर्कर्स पार्टी के इस अनुभवी नेता को कुल मतों का 51.76 फीसदी हिस्सा प्राप्त हुआ है। उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.24 फीसदी वोट मिले हैं। यह चुनाव लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा था। लूला ने इससे पहले 2003 से 2010 तक ब्राज़ील के राष्ट्रपति के तौर पर सेवाएं दी हैं। हालिया चुनाव परिणामों ने चुनावी सर्वे के उन अनुमानों को गलत साबित कर दिया है, जिनमें बोल्सोनारो को मामूली अंतर से आगे दिखाया गया था। चुनाव प्रक्रिया के दौरान रविवार को सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश ने मतदान के लिए अतिरिक्त दो घंटे का समय प्रदान किया था। यह निर्णय कई राज्यों में सार्वजनिक परिवहन की कमी के कारण मतदाताओं को हुई दिक्कतों को देखते हुए लिया गया था। लूला का नया कार्यकाल आधिकारिक रूप से पांच जनवरी 2027 से शुरू होगा।
विवादास्पद नतीजे और फ्लावियो का रुख
चुनावी हार के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो ने परिणामों को स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। 45 वर्षीय सीनेटर फ्लावियो ने इन नतीजों को अतार्किक और समझ से परे बताते हुए चुनाव रद्द करने की मांग रखी है। उन्होंने इस विषय पर अपने पिता जायर बोल्सोनारो के रुख का अनुसरण किया है, जिन्होंने 2022 के चुनावों में अपनी पराजय को स्वीकार करने से मना कर दिया था। जायर बोल्सोनारो को वर्तमान में तख्तापलट की साजिश रचने के मामले में दोषी पाए जाने के कारण 27 साल की सजा मिली है, जिसे वह स्वास्थ्य कारणों से घर पर काट रहे हैं। दूसरी ओर, लूला ने अपनी जीत को पक्का करने के लिए अभियान के अंतिम चरण में कर्ज माफी, सप्ताहांत पर मुफ्त बस सेवा और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए वित्तीय मदद जैसी कई लोकलुभावन घोषणाएं की थीं। विपक्षी खेमे ने इन कदमों को वोट खरीदने की कोशिश बताते हुए सरकारी खजाने पर अतिरिक्त दबाव डालने वाला करार दिया था। फ्लावियो बोल्सोनारो ने अपने प्रचार के दौरान सरकारी व्यय में कटौती और टैक्स कम करने के वादे किए थे।
राजनीतिक चुनौती और भविष्य का परिदृश्य
लूला की जीत ने लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी लहर के प्रभाव को एक बड़ा झटका दिया है। पूर्व मेटल वर्कर लूला के लिए आगामी कार्यकाल अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि उन्हें संसद में कड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें अमेरिकी प्रशासन के साथ संबंधों को संतुलित करने की चुनौती भी झेलनी होगी, क्योंकि अमेरिका अक्सर क्षेत्र में अपनी नीतियों के अनुरूप चलने वाली सरकारों को प्राथमिकता देता है। लूला ने पहले ही चेतावनी दी है कि ब्राज़ील कभी भी किसी अन्य देश का पिछलग्गू नहीं बनेगा। पर्यावरण संरक्षण के पैरोकारों ने लूला की वापसी का स्वागत किया है, क्योंकि उन्हें अमेजन के जंगलों में वनों की कटाई को लेकर बोल्सोनारो के कार्यकाल में चिंताएं थी। वहीं, चीन के प्रति लूला के दोस्ताना रुख के कारण भविष्य में व्यापारिक समीकरण भी बदल सकते हैं। अपने पांच दशकों के सार्वजनिक जीवन में लूला ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं और अब अपने चौथे कार्यकाल के समापन तक वे 85 वर्ष के हो जाएंगे।