उमराह यात्रा पर गए लोगों की वापसी अटकी
धार्मिक यात्रा के तहत सऊदी अरब पहुंचे गोरखपुर क्षेत्र के कई निवासी अपनी तयशुदा तारीख पर घर नहीं लौट सके हैं। इस दल में सूरजकुंड इलाके के रहने वाले सैयद नदीम अहमद के साथ उनकी पत्नी चांदनी खातून शामिल हैं। इसके अलावा तकिया कवलदह निवासी मो। खुर्शीद आलम अपनी पत्नी सानिया खानम के साथ इस समूह का हिस्सा हैं। इनके अलावा अफजल और आबाद नाम के लोग भी इसी समूह में शामिल होकर वहां गए हुए थे। इन सभी श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुष्ठान पूरा करने के बाद इक्कीस अक्टूबर को भारत वापस लौटना था। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों के चलते उनकी घर वापसी का इंतजार अब काफी लंबा हो चुका है और वे सभी विदेशी धरती पर ही रुके हुए हैं। परिवार के लोग लगातार फोन के जरिए उनका हालचाल ले रहे हैं ताकि कुछ मानसिक तसल्ली मिल सके। लेकिन सभी की मुख्य चिंता यही बनी हुई है कि जब तक उनकी सुरक्षित व सकुशल वापसी नहीं हो जाती तब तक बेचैनियां कम नहीं होंगी।
विद्रोही हमलों से उड़ानें बाधित और संपर्क की कोशिश
विदेश में फंसे इन श्रद्धालुओं के अनुसार वहां के हवाई क्षेत्र में बड़ी बाधा उत्पन्न हो गई है। मध्य पूर्व क्षेत्र में हूती विद्रोहियों द्वारा किए जा रहे लगातार हमलों के कारण उड़ानों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसी वजह से विमान सेवाएं समय पर नहीं मिल पा रही हैं और लोगों को वहां रुकना पड़ रहा है। अपनी यात्रा की योजना में बदलाव करने, उड़ानों की ताजा स्थिति जानने और वैकल्पिक व्यवस्था तलाशने के लिए इन लोगों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। इन्हें संबंधित विमानन कंपनियों यानी एयरलाइंस और उमराह यात्रा का प्रबंधन देखने वाले टूर ऑपरेटरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वे लगातार फोन और अन्य माध्यमों से संपर्क साधकर भारत लौटने का रास्ता ढूंढ रहे हैं। दूसरी ओर, गोरखपुर में उनके परेशान स्वजन भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठे हैं। वे लोग अपने स्तर पर हरसंभव प्रयास कर रहे हैं और सहायता पाने के लिए भारतीय दूतावास के साथ-साथ संबंधित वाणिज्य दूतावास से भी लगातार संपर्क साधने की कोशिश में जुटे हुए हैं ताकि किसी तरह सुरक्षित वापसी की अनुमति मिल सके।
बढ़ता वित्तीय संकट और प्रशासन की मदद का भरोसा
निर्धारित समय पर वापसी न हो पाने के कारण इन यात्रियों के सामने एक नया आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। यात्रा की योजना आमतौर पर एक निश्चित बजट और पहले से तय कार्यक्रम के आधार पर बनाई जाती है। जब वापसी में अचानक देरी हो जाती है तो वहां रहने और खाने-पीने जैसी दैनिक जरूरतों का खर्च उठाना काफी कठिन हो जाता है। ट्रेवल एजेंसी का संचालन करने वाले नेहाल अहमद ने इस बात की पुष्टि की है कि अचानक यात्रा लंबी खिंचने से अतिरिक्त पैसों का इंतजाम करना जायरीनों के लिए बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। गोरखपुर शहर में उनके रिश्तेदार और परिवार के लोग गहरी चिंता में डूबे हुए हैं और सभी लोग यही प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी सुरक्षित घर वापसी जल्द से जल्द सुनिश्चित हो सके। इस बीच स्थानीय प्रशासन भी हरकत में आ गया है और जिला अल्पसंख्यक अधिकारी कमलेश कुमार मौर्य ने स्थिति पर बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अल्पसंख्यक विभाग की ओर से हज यात्रियों की जल्द वापसी के लिए दूतावास से संपर्क साधा जाएगा और उनकी सुरक्षित घर वापसी के वास्ते हरसंभव प्रशासनिक प्रयास किए जाएंगे।