भारतीय चिकित्सा अनुसंधान के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली में देश के पहले समर्पित अत्याधुनिक जीन थेरेपी सेंटर का औपचारिक उद्घाटन किया गया है। यह नया केंद्र उन हजारों मरीजों के लिए एक नई उम्मीद की किरण बनकर आया है जो हीमोफिलिया, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और थैलेसीमिया जैसे गंभीर एवं दुर्लभ आनुवंशिक विकारों से पीड़ित हैं, जिनका इलाजこれまで पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से बेहद खर्चीला और कठिन माना जाता था। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और एम्स के वरिष्ठ वैज्ञानिकों की उपस्थिति में इस केंद्र का लोकार्पण किया गया। संस्थान के निदेशकों ने बताया कि इस केंद्र में विश्व स्तरीय जीन संपादन तकनीक और अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जहां भारतीय रोगियों की आनुवंशिक संरचना के अनुसार सटीक उपचार विकसित किया जाएगा।
आम नागरिकों के लिए किफायती और सुलभ इलाज जीन थेरेपी और स्टेम सेल तकनीक आधारित उपचार आमतौर पर इतने महंगे होते हैं कि आम आदमी की पहुंच से बाहर रहते हैं, लेकिन एम्स के इस नए केंद्र का मुख्य उद्देश्य इन अत्याधुनिक उपचारों को न्यूनतम लागत पर या सरकार समर्थित योजनाओं के तहत पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराना है। संस्थान की शोध टीम ने देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसे मरीजों का डेटाबेस तैयार करना शुरू कर दिया है जिन्हें इस थेरेपी से तुरंत लाभ मिल सकता है। इसके अलावा, देश के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों और शोधकर्ताओं को भी इस उन्नत तकनीक का प्रशिक्षण देने के लिए एक विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में इस प्रकार के इलाज देश के अन्य महानगरों और क्षेत्रीय अस्पतालों में भी आसानी से दिए जा सकें। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत को मेडिकल टूरिज्म के साथ-साथ अत्याधुनिक चिकित्सा अनुसंधान का भी एक बड़ा वैश्विक केंद्र बना देगा।
वैश्विक सहयोग और भविष्य की अनुसंधान योजनाएं इस जीन थेरेपी सेंटर की स्थापना में दुनिया के कई शीर्ष अनुसंधान संस्थानों और जैव-प्रौद्योगिकी कंपनियों का तकनीकी सहयोग लिया गया है। एम्स के वैज्ञानिकों ने घोषणा की है कि वे जल्द ही दुर्लभ बीमारियों के स्वदेशी वायरल वैक्टर और थेराप्यूटिक मॉलिक्यूल्स विकसित करने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल स्टार्टअप्स के साथ संयुक्त अनुसंधान समझौते करेंगे। इस पहल से न केवल देश में आयातित महंगी दवाओं पर निर्भरता कम होगी, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को भी चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा बल मिलेगा। मरीजों के परिवारों और विभिन्न रोगी सहायता समूहों ने सरकार और एम्स प्रशासन के इस संवेदनशील और दूरदर्शी निर्णय की जमकर सराहना की है।