हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम सरकार ने संयुक्त रूप से आज हिमालयी क्षेत्रों में प्लास्टिक के पूर्ण उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। पर्यटकों के लिए अब हिमालयी ट्रैक पर जाने से पहले अपने साथ ले जाने वाले प्लास्टिक कचरे का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। 'क्लीन हिमालय' नाम के इस अभियान के तहत हर पर्यटक को एक सुरक्षा राशि जमा करनी होगी, जो कचरा वापस लाने पर ही वापस की जाएगी। यह पहल हिमालयी नदियों और ग्लेशियरों को प्रदूषण से बचाने के लिए उठाई गई है, जो जलवायु परिवर्तन के चलते पहले ही संकट में हैं।
पर्यटन और पर्यावरण संतुलन
स्थानीय समुदायों ने इस पहल का स्वागत किया है, क्योंकि प्लास्टिक कचरा उनके जल स्रोतों और पशुधन के लिए एक बड़ी समस्या बन गया था। पर्यटन विभाग ने कहा है कि वे होमस्टे और कैंप संचालकों को भी इस नियम का सख्ती से पालन करने का निर्देश दे चुके हैं। उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान भी किया गया है। यह अभियान न केवल हिमालय को बचाने के लिए है, बल्कि पर्यटकों के बीच जिम्मेदारी का भाव जगाने के लिए भी एक बड़ा सामाजिक प्रयोग माना जा रहा है।
वैश्विक सहयोग की आवश्यकता
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम अन्य पहाड़ी देशों के लिए भी एक उदाहरण पेश करेगा। हिमालयी क्षेत्र में आने वाले लाखों पर्यटकों के कारण उत्पन्न होने वाला कचरा एक वैश्विक चुनौती बनता जा रहा है। इस अभियान के दूसरे चरण में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट लगाने की भी योजना है, जिससे कचरे का निपटान वैज्ञानिक तरीके से किया जा सके। सरकारें अब अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से तकनीकी सहयोग लेने पर भी विचार कर रही हैं ताकि भविष्य में इस मॉडल को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके और हिमालय को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।