भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों ने आज कैंसर के उपचार में एक क्रांतिकारी सफलता का दावा किया है। उन्होंने एक ऐसी 'स्मार्ट ड्रग डिलीवरी' प्रणाली विकसित की है जो केवल कैंसर कोशिकाओं को लक्षित करती है और आसपास के स्वस्थ ऊतकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती है। यह तकनीक विशेष रूप से फेफड़ों और स्तन कैंसर के रोगियों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है। क्लिनिकल ट्रायल के पहले चरण के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे हैं, जिसमें रोगियों में ट्यूमर के आकार में काफी कमी देखी गई है। यह शोध पिछले पांच वर्षों से चल रहा था और अब इसे वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलने लगी है।
उपचार का भविष्य इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसकी लागत है। पारंपरिक कीमोथेरेपी की तुलना में यह विधि काफी सस्ती होने की उम्मीद है, जिससे आम लोगों को भी कैंसर के उन्नत इलाज तक पहुंच मिलेगी। शोध टीम के प्रमुख डॉ. आर.के. शर्मा ने कहा कि यह न केवल कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती है, बल्कि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत बनाती है ताकि बीमारी दोबारा न हो। उन्होंने बताया कि जल्द ही इसका बड़े पैमाने पर मानव परीक्षण शुरू किया जाएगा, जिसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने पहले ही मंजूरी दे दी है।
वैश्विक स्तर पर मान्यता दुनिया भर के मेडिकल जर्नल इस शोध की सराहना कर रहे हैं और इसे कैंसर अनुसंधान में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। भारतीय फार्मास्युटिकल कंपनियां भी इस तकनीक के उत्पादन के लिए रुचि दिखा रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह तकनीक सफल रहती है, तो भारत कैंसर के इलाज के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अभी भी बहुत काम बाकी है और इसे पूरी तरह से बाजार में आने में कम से कम दो से तीन साल लग सकते हैं। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ यह खोज मानवता के लिए एक नई उम्मीद की किरण है।