आज नई दिल्ली में आयोजित एक स्वास्थ्य सम्मेलन के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि आगामी 1 सितंबर से कैंसर की 40 से अधिक आवश्यक दवाओं की कीमतों में 60 प्रतिशत तक की कटौती की जाएगी। यह निर्णय मध्यम और गरीब वर्ग के परिवारों के लिए बहुत बड़ी राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से इस बीमारी के भारी खर्च से जूझ रहे हैं। सरकार ने इसके लिए फार्मास्युटिकल कंपनियों के साथ एक समझौता किया है जिसके तहत जेनेरिक दवाओं के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। यह कदम प्रधानमंत्री की 'स्वस्थ भारत, सशक्त भारत' पहल का एक प्रमुख हिस्सा है।
दवाओं की उपलब्धता सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि ये दवाएं देश के हर जिले के सरकारी जन औषधि केंद्रों पर आसानी से उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दवा की उपलब्धता की रीयल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा भी दी जाएगी। डॉक्टर अब मरीजों को ब्रांडेड दवाओं के बजाय जेनेरिक विकल्प लिखने के लिए अधिक प्रोत्साहित करेंगे, जिससे आम आदमी का इलाज का खर्च कम हो सके। कैंसर विशेषज्ञों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है और इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया है।
भविष्य की योजनाएं स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी कि आने वाले वर्षों में सरकार देश भर में 50 नए कैंसर संस्थान स्थापित करेगी। इन संस्थानों में अत्याधुनिक तकनीक और रेडियोथेरेपी की सुविधा सस्ती दरों पर मुहैया कराई जाएगी। सरकार का ध्यान केवल इलाज पर ही नहीं बल्कि शुरुआती दौर में बीमारी की पहचान करने पर भी है, जिसके लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि दवाओं की कीमत कम होती है, तो बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए आगे आएंगे और मृत्यु दर में भी कमी आएगी।