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स्वास्थ्य पर सर्वोच्च अदालत की सख्त टिप्पणी: खाद्य पदार्थों की फ्रंट-पैकेज लेबलिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कड़ा सवाल

देश में बिकने वाले पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर स्पष्ट फ्रंट-ऑफ-पैकेज न्यूट्रीशनल लेबलिंग लागू करने में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से तीखे सवाल किए हैं।

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Kantap News डेस्क
16 अग 2026, 12:21
स्वास्थ्य पर सर्वोच्च अदालत की सख्त टिप्पणी: खाद्य पदार्थों की फ्रंट-पैकेज लेबलिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कड़ा सवाल
आम नागरिकों के स्वास्थ्य और उपभोक्ता अधिकारों को प्राथमिकता देते हुए देश के उच्चतम न्यायालय ने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों की लेबलिंग के मामले में केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या भारत को अभी भी एक अविकसित देश की तरह बने रहने दिया जाना चाहिए जहां नागरिकों को उनके द्वारा खाए जाने वाले भोजन में मौजूद पोषक तत्वों और हानिरकारक तत्वों की स्पष्ट जानकारी न मिले। अदालत ने खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण और संबंधित विभागों को इस दिशा में तत्काल और प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया है।

उपभोक्ता अधिकार और स्वास्थ्य संकट

आजकल बाजार में बिकने वाले प्रोसेस्ड और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में अत्यधिक मात्रा में चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट पाए जाते हैं, जिसके कारण देश में मधुमेह और मोटापे जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्पादों के सामने स्पष्ट चेतावनी या न्यूट्री-स्कोर लेबलिंग हो, तो आम जनता खरीदारी करते समय सही और स्वास्थ्यकर चुनाव कर सकेगी। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की हीला-हवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सरकार का पक्ष और अगली कार्रवाई

इस मामले में सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया है, लेकिन अदालत के कड़े रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि खाद्य उद्योग पर अब कड़े नियम लागू होने की पूरी संभावना है। उपभोक्ता मामलों के जानकारों ने सुप्रीम कोर्ट की इस पहल का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि जल्द ही देश में सख्त फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग के नियम अनिवार्य कर दिए जाएंगे। यह कदम जनस्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
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