Lucknow Desk : बुधवार को सबसे कम उम्र में विधायक बनने वाले कुशाग्र सागर ने इस्तीफ दे दिया है। आपको बता दे कि इस उलटफेर के कयास करीब 20 दिन से जिले में लगाए जा रहे थे, अखिरकार वो हो ही गया। 11 साल तक भाजपा का झंडा उठाने वाले कुशाग्र ने आत्मसम्मान को फैसले की वजह बताया, लेकिन सियासी गलियारों में उनके अगले ठिकाने और सपा से संभावित नजदीकियों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कुशाग्र सागर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर पार्टी से अलग होने के अपने फैसले पर बात रखी। उन्होंने कहा कि तमाम निजी परेशानियों और मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने संगठन के प्रति अपनी जिम्मेदारियां पूरी निष्ठा से निभाईं। पार्टी को परिवार मानकर लगातार काम किया, लेकिन बदले में वह सम्मान और जुड़ाव महसूस नहीं कर सके, जिसकी उन्हें उम्मीद थी।
इसी अनुभव ने उन्हें यह फैसला लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने पार्टी से मिले मौकों और सीख के लिए आभार जताया और आत्मसम्मान के साथ नई शुरुआत करने की बात कही। हालांकि, उन्होंने अपने संदेश में किसी नेता या घटना का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के आशुतोष मौर्य ने कुशाग्र सागर को करीब 1,834 वोटों से हराया था। इसके बाद राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग और भाजपा के कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी को लेकर जिले में चर्चाएं तेज हो गई थीं। राजनीतिक गलियारों में उन्हें भाजपा के करीब माना जा रहा था।
साथ ही, उनके जल्द भाजपा में शामिल होने की अटकलें भी लगाई जा रही थीं। ऐसे में कुशाग्र सागर के भाजपा से इस्तीफा देने की खबर ने राजनीतिक चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है। राजनीति में लंबे समय तक साथ रहने के बाद भी कई बार रिश्तों में बदलाव आ जाता है। बदायूं के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर का भाजपा से इस्तीफा इसी कड़ी में चर्चा का विषय बना हुआ है। 21 अक्टूबर 2026 को उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने के साथ संगठन के सभी पदों से भी इस्तीफा देने का ऐलान किया। उनके इस फैसले के बाद भाजपा के साथ उनके करीब 11 साल पुराने राजनीतिक जुड़ाव को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।