Lucknow Desk : किसान नेता वीएम सिंह ने किसानों के बकाया भुगतान और उस पर मिलने वाले ब्याज के मुद्दे को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसानों के भुगतान में देरी होने पर ब्याज मिलने की बात अदालत ने भी मानी है, लेकिन किसानों के हितों की बात करने वाले नेताओं ने इस मुद्दे को प्रमुखता से नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि आंदोलन करना नेताओं का काम है, लेकिन वह कानूनी लड़ाई लड़कर किसानों को उनका हक दिलाकर रहेंगे। बुधवार को बागपत के बामनौली गांव में हेमंत एडवोकेट के आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए वीएम सिंह ने कहा कि किसानों को उनका हक दिलाने के लिए केवल बड़े-बड़े आंदोलन करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि कानूनी स्तर पर भी मजबूती से लड़ाई लड़नी होगी। किसानों के भुगतान में देरी होने पर उन्हें ब्याज मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब अदालत ने भी देरी से भुगतान के मामले में किसानों को ब्याज दिए जाने की बात स्वीकार की है, तो इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों को भी खुलकर सामने आना चाहिए। वीएम सिंह ने कहा कि चार लाख ट्रैक्टर तैयार होने की बात करने वाले किसान नेताओं ने भी किसानों के बकाया भुगतान पर ब्याज के मुद्दे को प्रमुखता से नहीं उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जब किसानों के हितों की बात की जाती है, तो उनके आर्थिक नुकसान और भुगतान में देरी के कारण होने वाली परेशानी पर भी गंभीरता से आवाज उठाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसानों को उनका अधिकार दिलाने के लिए वह कानूनी रास्ते से संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि किसानों के भुगतान और ब्याज के मामले में सरकारों को ठोस कदम उठाने चाहिए। उनके अनुसार, जब किसानों के अधिकारों का मामला सामने आया तो सरकारें सुप्रीम कोर्ट तक चली गईं। उन्होंने कहा कि किसानों को उनके बकाया भुगतान और ब्याज के मामले में न्याय मिलना चाहिए तथा इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए। वीएम सिंह ने किसान एकता पर जोर देते हुए कहा कि जब तक किसान जातियों में बंटा रहेगा, तब तक उसे उसका हक नहीं मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याएं जाति के आधार पर अलग-अलग नहीं होतीं। खेती की लागत, फसलों का उचित मूल्य, गन्ने का भुगतान और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं से सभी किसान प्रभावित होते हैं। ऐसे में किसानों को जातिगत सीमाओं से ऊपर उठकर अपने साझा हितों के लिए एकजुट होना होगा।
उन्होंने कहा कि किसान एकजुट होकर ही अपने अधिकारों की लड़ाई को मजबूत बना सकते हैं। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर वीएम सिंह ने कहा कि 243 सीटों पर किसान और किसानों के बेटे चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने इस घोषणा के जरिए किसानों की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की बात कही। उनके बयान से स्पष्ट है कि वह किसानों को केवल आंदोलन तक सीमित रखने के बजाय राजनीतिक प्रतिनिधित्व के माध्यम से भी अपनी समस्याएं उठाने के पक्ष में हैं। हालांकि, इन सीटों पर उम्मीदवारों के चयन, चुनाव लड़ने के तरीके और राजनीतिक संगठन की रूपरेखा को लेकर उन्होंने क्या विस्तृत योजना बनाई है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। वीएम सिंह ने कहा कि किसानों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना होगा। भुगतान, ब्याज और कृषि से जुड़े अन्य मुद्दों पर किसानों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि किसानों को उनका हक दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखी जाएगी।