वाराणसी से चुनावी अभियान की शुरुआत
विगत दस वर्षों से इस जिले को भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ समझा जाता रहा है। अब इसी स्थान से विपक्षी दल के नेता अखिलेश यादव भगवा दल को सीधे मैदान में चुनौती देने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आगामी 31 अक्टूबर को अपने चुनाव प्रचार प्रसार की विधिवत शुरुआत करने जा रहे हैं। यह तारीख इसलिए भी खास है क्योंकि इसी दिन देश भर में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाई जाएगी। पार्टी प्रमुख इस महत्वपूर्ण दिन पर वाराणसी जनपद के अकेलवां क्षेत्र से अपनी पहली बड़ी चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर पार्टी के तमाम कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने अपनी तरफ से तैयारियां अभी से तेज कर दी हैं। विशेष तौर पर ग्रामीण इलाकों जैसे सेवापुरी, रोहनिया, पिंडरा और शिवपुर के मतदाताओं से संपर्क साधकर उन्हें इस विशाल जनसभा से जुड़ने का निरंतर आग्रह किया जा रहा है। इस पूरी राजनीतिक गतिविधि को लेकर पूरे इलाके में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।
पटेल मतदाताओं पर राजनीतिक फोकस
राजनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि इस जनपद की पांच विधानसभा सीटों पर पटेल समुदाय के मतदाताओं का बहुत बड़ा और सीधा प्रभाव रहता है। बीते वर्ष संपन्न हुए 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान इस वर्ग की दूरी भारतीय जनता पार्टी से साफ तौर पर देखी गई थी। इस सियासी खाई को पाटने और उस नाराजगी की भरपाई करने के लिए भाजपा की तरफ से भी कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है। इसी कड़ी में पूर्व मंत्री रवि किशन ने भी विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि इनका शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। सरदार पटेल की जयंती पर आयोजित होने वाली इस जनसभा का प्रभाव केवल रोहनिया और सेवापुरी विधानसभा क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रहेगा। इसका असर जिले की सभी पांच विधानसभा सीटों पर फैले एक लाख से अधिक पटेल मतदाताओं तक पहुंचेगा और उनके पास पार्टी का एक स्पष्ट संदेश जाएगा। इस संपूर्ण आयोजन की विशेष जिम्मेदारी पूर्व मंत्री सुरेंद्र पटेल को सौंपी गई है। मीडिया से बातचीत के दौरान सुरेंद्र पटेल ने खुलकर बयान दिया कि इस समाज के किसान खुद को काफी ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने आगे यह भी कहा कि इस बार समाज के लोगों ने सरकार को सत्ता से पूरी तरह उखाड़ फेंकने का पक्का मन बना लिया है और इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों से ही हो जाएगी।
पूर्वांचल साधने की बड़ी रणनीति
ऐसा माना जाता है कि उत्तर प्रदेश की सत्ता की राजधानी लखनऊ का मुख्य रास्ता पूर्वांचल से ही होकर गुजरता है और इस पूरे पूर्वांचल का मुख्य केंद्र वाराणसी जनपद ही है। सियासी दृष्टिकोण से इस जिले को एक बहुत बड़ा राजनीतिक अखाड़ा माना जाता है जहां से उठने वाली हुंकार पूरे पूर्वांचल क्षेत्र में दूर-दूर तक गूंजती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए विपक्षी दल के प्रमुख इस जनपद की धरती से पूर्वांचल के सभी समीकरणों को अपने पक्ष में साधने का कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते हैं। इस बड़े जनसभा कार्यक्रम से ठीक पहले उन्होंने दशहरे के पावन पर्व के दिन ही दो विशेष प्रचार रथों को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना कर दिया था। पार्टी की पूरी रणनीति यह है कि इन सभी आयोजनों के माध्यम से जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित किया जाए। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह अभियान राज्य की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। स्थानीय पदाधिकारी इस आयोजन को सफल बनाने के लिए घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं और उन्हें पार्टी की नीतियों से अवगत करा रहे हैं।