कुमारस्वामी ने संभाला मोर्चा
कर्नाटक की राजनीतिक सरगर्मी के बीच जनता दल सेक्युलर के प्रमुख नेता एच डी कुमारस्वामी ने कांग्रेस प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। वर्तमान समय में वह राज्य की व्यवस्था के सबसे मुखर आलोचक के रूप में सामने आए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनका यह बढ़ता हुआ आक्रामक रुख आने वाले समय की चुनावी रणनीतियों से जुड़ा हो सकता है। उनके इस तरह अकेले ही तमाम मुद्दों पर आगे बढ़ने से भारतीय जनता पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं के भीतर नाराजगी भी देखी जा रही है। प्रदेश इकाई के कुछ पदाधिकारियों को ऐसा अंदेशा है कि आगामी राजनीतिक घटनाक्रम में यह दल कोई भिन्न मार्ग भी चुन सकता है। केंद्रीय स्तर पर इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे कुमारस्वामी का पूरा ध्यान इस समय प्रांतीय राजनीति पर ही केंद्रित दिखाई देता है। हाल ही में सामने आए स्टिंग वीडियो प्रकरण सहित अनेक विषयों पर उनके आक्रामक तेवरों ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। इन तमाम गतिविधियों के बीच मुख्य विपक्षी दल की भूमिका को लेकर राजनीतिक गलियारों में विभिन्न चर्चाएं चल रही हैं और रणनीतिक समीकरणों पर नए सिरे से विचार किया जाने लगा है।
विभिन्न मुद्दों पर तीखे हमले
विगत कुछ महीनों के दौरान जनता दल सेक्युलर के शीर्ष नेता ने कई गंभीर मामलों को उठाकर शासन व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने बिदादी टाउनशिप योजना, बेंगलुरु-मैसूरु इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर से जुड़े विवाद, लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और हालिया वीडियो प्रकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार को आड़े हाथों लिया है। इन लगातार और तीखे प्रहारों के कारण उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार तथा उनके मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ मंत्रियों को बार-बार सफाई देनी पड़ी है। स्टिंग वीडियो मामले को लेकर तो पिछले सप्ताह ही उन्होंने कई संवाददाता सम्मेलन आयोजित किए थे। इन सम्मेलनों के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री पर यह गंभीर आरोप लगाया था कि उनके खेमे में विरोधियों को घेरने के लिए वीडियो तैयार करने का एक केंद्र चलाया जा रहा है। इन आरोपों के जवाब में मुख्यमंत्री ने केवल इतना कहा था कि आने वाला समय ही इसका उत्तर देगा। दूसरी तरफ जनता दल सेक्युलर के एक वरिष्ठ नेता का यह दावा रहा है कि उनके दल के सर्वोच्च नेता ही इस समय वास्तविक विपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है और दोनों ही एक ही समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।
गठबंधन का भविष्य और भविष्य की रणनीति
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में भारतीय जनता पार्टी की तुलना में जनता दल सेक्युलर ने कई मामलों को अधिक मुखरता से उठाया है। विपक्षी खेमे में नेता प्रतिपक्ष या प्रदेश अध्यक्ष के मुकाबले कुमारस्वामी के बयानों और तर्कों का वजन अधिक माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इसी खालीपन का पूरा लाभ जनता दल सेक्युलर को मिल रहा है क्योंकि उनके नेता हर मुद्दे पर आक्रामक रूप से अपनी बात रखते हैं। भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी इस बात को स्वीकार किया गया है कि यद्यपि उन्होंने भी आवाज उठाई थी लेकिन वे उस स्तर पर सफल नहीं हो पाए जितनी सफलता इस पूर्व मुख्यमंत्री को मिली है। इन तमाम परिस्थितियों के कारण दोनों दलों के आपसी संबंधों के भविष्य को लेकर तरह-तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं। हालांकि इन सभी अटकलों और चर्चाओं को पूरी तरह खारिज करते हुए भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने स्पष्ट किया है कि दोनों दल एकजुट हैं। उन्होंने यह विश्वास भी जताया कि दोनों दल मिलकर इस प्रशासन को सत्ता से बेदखल करने का काम करेंगे। इस प्रकार राज्य की राजनीति में आगामी चुनावों को लेकर नए समीकरण बनने की पूरी संभावना नजर आ रही है।