कंटाप
NEWS
गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
मुझे गालियां पड़ेंगी, लेकिन...; योगेंद्र यादव ने कहा- अभी मोदी का इस्तीफा नहीं चाहते लोग      श्रद्धा दुबे तो निकली बड़ी खिलाड़ी, Z गैंग से भी कनेक्शन, लखनऊ लेकर आई पुलिस, बचना हुआ मुश्किल      Rain Alert: बन गया है कम दबाव का क्षेत्र, इन राज्यों में होने जा रही मूसलाधार बारिश, आंधी तूफान का भी अलर्ट      Tiger Shroff Attack Case में बड़ा खुलासा, वारदात से पहले शूटरों ने की थी बंदूक चलाने की प्रैक्टिस, हुआ था म      सऊदी अरब पर अटैक से भड़का भारत, विदेश मंत्रालय की दो टूक- तुरंत बंद हों हमले      फ्रांस में किस धर्म के कितने लोग, यहां कितने रहते हैं मुस्लिम?      30 साल तक..., SIR पर हंगामे के बीच अमित शाह की भविष्यवाणी, राहुल के विदेश दौरे पर भी तंज      दिल्ली में AAP और कांग्रेस की पार्षद भिड़ीं, MCD सदन में खींचतान के बाद आई हाथापाई की नौबत     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
राजनीति

किसान संकट पर रोष: कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवाड़ ने मंडियों की व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

हरियाणा में किसानों की बदहाल स्थिति पर कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवाड़ ने तीखा रोष जताया है। उन्होंने मंडियों में अन्नदाताओं के सामने आ रही प्रशासनिक और तकनीकी बाधाओं को लेकर सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं।

A
Ankit Yadav
22 अक्ट 2026, 13:01
किसान संकट पर रोष: कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवाड़ ने मंडियों की व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

विधायक जस्सी पेटवाड़ का अन्नदाताओं की समस्याओं पर तीखा प्रहार

किसानों की भारी दुर्दशा और परेशानियों के गंभीर मुद्दे पर कांग्रेस के विधायक जस्सी पेटवाड़ ने कड़े शब्दों में आवाज उठाई है। उन्होंने राज्य की कृषि उपज विपणन समितियों और अन्न खरीद केंद्रों पर चल रही व्यवस्थाओं को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। किसानों को अपनी फसल बेचने के दौरान कई प्रकार की जटिल और अनावश्यक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। विधायक ने इस बात पर खास तौर पर गहरी नाराजगी जाहिर की है कि संकट के इस दौर में भी अन्नदाताओं की सुध लेने वाला कोई ठोस तंत्र मौजूद नहीं है। कृषि कार्यों में जुटे लोगों को अपनी मेहनत का वाजिब हक पाने के लिए भी भारी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। स्थानीय स्तर पर किसानों के बीच इस बात को लेकर भारी असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रशासनिक और सरकारी महकमों की तरफ से इस दिशा में अब तक कोई भी सकारात्मक और राहत देने वाला कदम नहीं उठाया गया है। जनप्रतिनिधि के रूप में उन्होंने इस पूरे मामले को सार्वजनिक मंच पर पूरी प्रमुखता के साथ उठाया है ताकि जिम्मेदार लोगों तक सीधी बात पहुंच सके।

मंडियों में तीन गवाहों की शर्त पर कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल

अनाज मंडियों में फसल खरीद और सत्यापन प्रक्रिया के दौरान लगाई गई अजीबोगरीब शर्तों को लेकर विधायक ने कड़ा ऐराज जताया है। उन्होंने मुख्य रूप से यह सवाल पूछा है कि आखिर मंडियों में किसानों से तीन गवाह पेश करने की अनुचित शर्त क्यों रखी जाती है। फसल बेचने आए किसानों के लिए इतनी कठिन और जटिल औपचारिकताओं को पूरा करना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन और असंभव कार्य बन गया है। पहले से ही प्रकृति की मार और आर्थिक तंगी झेल रहे अन्नदाताओं को इस तरह के नियमों के कारण और अधिक प्रताड़ित होना पड़ रहा है। विधायक ने शासन और प्रशासन से सीधे तौर पर यह जानना चाहा है कि इस प्रकार के नियम किस आधार पर और किसके निर्देश पर लागू किए गए हैं। गवाहों से जुड़ी इस व्यवस्था के कारण किसानों का बहुमूल्य समय बर्बाद होता है और उनकी उपज समय पर नहीं बिक पाती है। दलालों और बिचौलियों के चंगुल से किसानों को बचाने के दावे करने वाले सरकारी तंत्र खुद ऐसे जटिल नियम बनाकर किसानों को परेशान कर रहे हैं। इस मुद्दे पर किसानों की तरफ से भी लगातार तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और नियमों को तत्काल प्रभाव से सरल बनाने की पुरजोर मांग की जा रही है।

अन्न संकट और कृषि व्यवस्थाओं की पृष्ठभूमि पर एक नजर

भारतीय कृषि व्यवस्था में अनाज मंडियां किसानों के लिए जीवन रेखा मानी जाती हैं जहां वे अपनी साल भर की मेहनत का फल बेचते हैं। पिछले कुछ समय से कृषि मंडियों के भीतर की कार्यप्रणाली, खरीद के तौर-तरीकों और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। किसानों को उनकी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सरकार कई तरह के दावे करती है। जमीनी स्तर पर लागू होने वाले नियम और कागजी औपचारिकताएं अक्सर किसानों के लिए मददगार साबित होने के बजाय बड़ी मुसीबत बन जाती हैं। इस तरह के मामलों से जुड़े राजनीतिक बयान और विरोध प्रदर्शन अक्सर कृषि राजनीति के केंद्र में रहते हैं। विपक्षी दलों के नेता इस मुद्दे का इस्तेमाल सरकार की किसान विरोधी नीतियों को बेनकाब करने के लिए करते हैं। आने वाले दिनों में इस बात की पूरी संभावना है कि कृषि मंडियों के इन विवादित नियमों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी और अधिक तेज हो सकती है। किसानों के अधिकारों और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए इस तरह की आवाजें उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज