रांची से होगी सोहराय कला की शुरुआत
झारखंड राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों की सूरत बदलने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इस योजना के तहत सड़कों के किनारे पारंपरिक सोहराय चित्रकला उकेरी जाएगी। इस सौंदर्यकरण अभियान की विधिवत शुरुआत राजधानी रांची से की जाएगी। राज्य की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने वाली यह कला यात्रा सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले लोगों को एक नया अनुभव प्रदान करेगी। सरकार और संबंधित महकमे इस दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं ताकि राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थानीय संस्कृति की अनूठी झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दे सके। आम जनता और पर्यटकों के लिए भी यह आकर्षण का एक नया केंद्र बनेगा। सड़क के बुनियादी ढांचे के साथ सांस्कृतिक धरोहर का यह मेल राज्य की एक अलग पहचान स्थापित करेगा। स्थानीय कलाकारों को भी इस पहल के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन करने का एक बड़ा मंच मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
उच्च न्यायालय के सख्त निर्देश और पौधरोपण
इस पूरी परियोजना के क्रियान्वयन में उच्च न्यायालय के निर्देशों का विशेष रूप से पालन किया जा रहा है। माननीय उच्च न्यायालय ने राजमार्गों के सौंदर्यीकरण और पौधरोपण के कार्य को लेकर बहुत ही सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत के इन स्पष्ट आदेशों के बाद प्रशासन ने अपनी गतिविधियों को और अधिक तेज कर दिया है। पौधरोपण अभियान के तहत सड़कों के दोनों किनारों पर पौधे लगाए जाएंगे जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। न्यायालय के निर्देशों में यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सभी काम समय सीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ पूरे किए जाएं। प्रशासनिक अधिकारियों ने इस संबंध में कई दौर की उच्च स्तरीय बैठकें भी आयोजित की हैं। इन बैठकों में हाई कोर्ट के सभी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करने पर जोर दिया गया है। हरसंभव प्रयास किया जा रहा है कि निर्माण और सौंदर्यीकरण के दौरान पर्यावरण को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। न्यायपालिका की इस सख्ती से प्रशासनिक अमले में भी पूरी तरह से मुस्तैदी देखी जा रही है और सभी संबंधित विभाग समन्वय बनाकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
सड़क सौंदर्यीकरण की पृष्ठभूमि और महत्व
राष्ट्रीय राजमार्गों पर इस तरह के सांस्कृतिक और पर्यावरणीय कार्य देश भर में अपनी एक अलग मिसाल कायम करते हैं। सड़क मार्ग से सफर करने वाले यात्रियों को बेहतर और सुंदर वातावरण प्रदान करना इस नीति का मुख्य उद्देश्य होता है। झारखंड अपनी समृद्ध आदिवासी परंपरा और प्राचीन लोक कलाओं के लिए पूरे देश में अपनी एक विशिष्ट पहचान रखता है। सोहराय कला मुख्य रूप से फसल कटाई और पर्व-त्योहारों के अवसर पर दीवारों पर बनाई जाने वाली पारंपरिक चित्रकला है। अब इसी पारंपरिक कला को राष्ट्रीय राजमार्गों की दीवारों पर स्थान देकर इसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रकार की पहलों से न केवल सड़कों की सुंदरता में इजाफा होता है बल्कि स्थानीय लोक कलाकारों को भी आर्थिक और सामाजिक संबल प्राप्त होता है। आने वाले दिनों में इस परियोजना का दायरा राज्य के अन्य प्रमुख राजमार्गों तक भी बढ़ाया जा सकता है। पर्यावरण की दृष्टि से पौधरोपण और संस्कृति की दृष्टि से सोहराय कला का यह अनूठा संगम झारखंड के विकास मॉडल में एक नया और सकारात्मक अध्याय जोड़ने का काम कर रहा है जिससे प्रदेश का गौरव और अधिक बढ़ेगा।