सदन में विपक्षी विधायकों का जोरदार प्रदर्शन
उत्तराखंड विधानसभा में बुधवार सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने भारी हंगामा खड़ा कर दिया। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने की मांग की थी, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने सिरे से खारिज कर दिया। इसके विरोध में विपक्षी सदस्य अपनी सीटों से उठकर अध्यक्ष के आसन के बेहद करीब पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। सदन के भीतर कांग्रेस विधायकों ने काले झंडे लहराए और विरोध के स्वर तेज कर दिए। इस दौरान सदन की कार्यसूची की प्रतियां फाड़कर हवा में उछाली गईं और सचिव की मेज पर रखी गई पुस्तकें भी नीचे पटक दी गईं। हंगामे की गंभीरता को देखते हुए अध्यक्ष को कार्यवाही तीन बार रोकनी पड़ी। पहली बार 11 बजकर 20 मिनट पर सदन को स्थगित किया गया, लेकिन उसके बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए। सदन के भीतर हुए इस अप्रत्याशित आचरण ने कार्यवाही को पूरी तरह से बाधित कर दिया और सरकारी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ।
अध्यक्ष की नाराजगी और विधायी कार्य
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने कांग्रेस विधायकों के इस आक्रामक और अमर्यादित रवैये पर अपनी कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने सदन के भीतर कार्यसूची फाड़ने और पत्रावलियां उछालने की घटनाओं को एक प्रकार का खेल करार दिया और इस पर तल्ख टिप्पणी की। अध्यक्ष ने विशेष रूप से कांग्रेस विधायकों द्वारा नारेबाजी के दौरान झुमका जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने सवाल किया कि सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला यह व्यवहार किस हद तक उचित है। हालांकि, विपक्षी खेमे की भारी नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन के बावजूद सदन ने अपना विधायी कार्य जारी रखा। हंगामे के शोर के बीच ही विधानसभा में 7844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया गया और उसे पारित कर दिया गया। इसके अलावा, राज्य के विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों से जुड़े कुल 10 अन्य विधेयक भी सदन में पास कराए गए। सरकारी कामकाज निपटाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।
सत्र का समापन और भ्रष्टाचार का मुद्दा
उत्तराखंड विधानसभा में बुधवार को हुआ यह हंगामा भ्रष्टाचार के उन आरोपों की पृष्ठभूमि में हुआ है जिसे लेकर कांग्रेस विधायक लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे थे। विपक्षी दलों का मुख्य तर्क था कि राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार पर सदन में तत्काल चर्चा होनी चाहिए। जब अध्यक्ष ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के माध्यम से इस पर बहस की अनुमति नहीं दी, तो विपक्ष ने इसे सरकार की जवाबदेही से बचने की कोशिश बताया। यह घटनाक्रम राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट अपने चरम पर है। सदन का अनिश्चितकाल के लिए स्थगन होने से अब इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर आगे की चर्चा के रास्ते फिलहाल बंद हो गए हैं। आम जनता के लिए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें राज्य के विकास और वित्तीय प्रावधानों से जुड़े 7844.18 करोड़ के अनुपूरक बजट पर बिना किसी व्यापक बहस के मुहर लगा दी गई। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से अनुशासनहीनता पर जताई गई कड़ी प्रतिक्रिया ने आने वाले समय में संसदीय कार्यवाही के दौरान विपक्ष के साथ टकराव के और अधिक गहराने के संकेत दिए हैं।