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राजनीति

स्टार्टअप पॉलिटिक्स: प्रशांत किशोर, थलपति विजय और अन्नामलाई जैसे चेहरे बदल रहे हैं भारतीय राजनीति की रूपरेखा

भारतीय राजनीतिक गलियारों में पारंपरिक पार्टियों से अलग एक नई कार्यशैली तेजी से उभर रही है, जिसे स्टार्टअप राजनीति का नाम दिया जा रहा है। प्रशांत किशोर, थलपति विजय और के. अन्नामलाई जैसे नाम इस नई व्यवस्था का नेतृत्व कर रहे हैं।

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Kantap News डेस्क
11 अग 2026, 14:10
स्टार्टअप पॉलिटिक्स: प्रशांत किशोर, थलपति विजय और अन्नामलाई जैसे चेहरे बदल रहे हैं भारतीय राजनीति की रूपरेखा
भारतीय राजनीतिक परिदृश्य में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक रूप से स्थापित राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के वर्चस्व के इतर, अब नए किस्म के राजनीतिक प्रयोग शुरू हो चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे 'स्टार्टअप पॉलिटिक्स' का नाम दे रहे हैं, जो पूरी तरह से नई रणनीति और सोच पर आधारित है। इस नए राजनीतिक मॉडल में पारंपरिक विचारधाराओं से हटकर सीधे जनता से जुड़ने और जमीनी स्तर पर अपनी नई पहचान बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

बदलते राजनीतिक समीकरण और नए चेहरे

इस नई राजनीतिक धारा के तहत कई जाने-माने रणनीतिकार और हस्तियां सीधे मैदान में उतर चुकी हैं। चुनावी रणनीतिकार के रूप में अपनी लंबी पहचान बनाने वाले प्रशांत किशोर ने जिस तरह से अपनी सक्रिय राजनीतिक जमीन तैयार की है, उसने सभी का ध्यान खींचा है। इसके अलावा, दक्षिण भारत में तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेता थलपति विजय का राजनीति में कदम रखना और तमिलनाडु में अपनी राजनीतिक पार्टी का आगाज करना एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसी प्रकार, भारतीय जनता पार्टी के तमिलनाडु इकाई के प्रमुख के. अन्नामलाई भी अपनी आक्रामक कार्यशैली और अलग राजनीतिक दृष्टिकोण के जरिए एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। पारंपरिक चुनावी राजनीति की पुरानी ढर्रे वाली रणनीतियों को पीछे छोड़ते हुए ये नेता और रणनीतिकार एक नए तरह के सियासी स्टार्टअप की तरह काम कर रहे हैं। इनमें डिजिटल जुड़ाव, डेटा-संचालित योजनाएं और जनता की बुनियादी समस्याओं पर सीधा फोकस शामिल है। आने वाले समय में देश के चुनावी मैदान में इन नए प्रयोगों का कितना असर होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि भारतीय लोकतंत्र में विकल्पों का दायरा अब तेजी से फैल रहा है और राजनीतिक दलों को अपनी पुरानी कार्यप्रणाली पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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