देश की आर्थिक प्रगति और आलोचकों पर तीखा हमला केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में देश के आर्थिक परिदृश्य को लेकर बेहद कड़े शब्दों में अपनी बात रखी और उन लोगों पर जमकर निशाना साधा जो राष्ट्र की तरक्की में अड़चनें आने या किसी प्रकार की विफलता देखने पर अंदरूनी खुशी महसूस करते हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस प्रकार की नकारात्मक सोच रखने वाले तत्वों को देश की बढ़ती हुई ताकत और उपलब्धियों से निराशा ही मिलती है। वित्त मंत्री ने अपने संबोधन के दौरान इस बात पर जोर दिया कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और आत्मनिर्भर स्तंभ के रूप में उभर रही है, जिसे रोकना किसी भी विरोधी ताकत के बस की बात नहीं है। उन्होंने आलोचकों के रवैये की कड़ी आलोचना करते हुए बताया कि कैसे कुछ लोग जानबूझकर देश के विकास कार्यों और सुधारों की आलोचना करते हैं ताकि राष्ट्रीय मनोबल को गिराया जा सके। ऐसे बयानों से यह साफ जाहिर होता है कि सरकार देश के भीतर और बाहर मौजूद उन सभी नकारात्मक शक्तियों के प्रति पूरी तरह से सजग है जो देश की आर्थिक छलांग को देखकर असहज महसूस करती हैं और हरसंभव तरीके से इसकी राह में भ्रम फैलाने का प्रयास करती रहती हैं।
दस प्रतिशत से अधिक जीडीपी वृद्धि की असीमित संभावनाएं अपने इस महत्वपूर्ण संबोधन के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केवल आलोचनाओं का जवाब ही नहीं दिया, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर एक बेहद महत्वाकांक्षी और सकारात्मक दृष्टिकोण भी देश के सामने रखा। उन्होंने पूरी दृढ़ता के साथ यह बात कही कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और सुधारों की गति को देखते हुए भारत के लिए दस प्रतिशत से भी अधिक की जीडीपी विकास दर हासिल करना पूरी तरह से संभव है। किसी भी विकासशील देश के लिए इतनी उच्च दर से आगे बढ़ना एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है और इसके लिए सरकार लगातार बुनियादी ढांचे, विनिर्माण क्षेत्र और डिजिटल आधुनिकीकरण पर भारी निवेश कर रही है। वैश्विक अर्थशास्त्र के जानकारों का भी यह मानना है कि जब किसी देश की नीतियां स्पष्ट होती हैं और जनसांख्यिकीय लाभांश पक्ष में होता है, तो इस प्रकार के बड़े लक्ष्य केवल कोरे सपने नहीं रह जाते बल्कि हकीकत बनने की पूरी क्षमता रखते हैं। देश के भीतर उत्पादकता बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे कदम, कर प्रणाली में पारदर्शिता और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को आकर्षित करने वाली नीतियां मिलकर एक ऐसा मजबूत चक्रव्यूह तैयार कर रही हैं जो भविष्य में दहाई अंकों की विकास दर के दरवाजे हमेशा के लिए खोल सकता है।
भविष्य की नीतियां और वैश्विक मंच पर भारत का बढ़ता कद भारत की बढ़ती हुई आर्थिक ताकत आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी स्पष्ट रूप से महसूस की जा रही है और दुनिया भर की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं नई दिल्ली के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने में जुटी हुई हैं। वित्त मंत्री के इस बयान के बाद देश के वित्तीय बाजारों और उद्योग जगत में भी एक नया उत्साह देखने को मिला है, जहां निवेशक भविष्य की संभावनाओं को लेकर खासे आशान्वित नजर आ रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार का मुख्य फोकस देश के छोटे और मध्यम उद्योगों को और अधिक सशक्त बनाने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर रहेगा ताकि समावेशी विकास का पहिया तेजी से घूम सके। जब देश का हर नागरिक और हर क्षेत्र इस आर्थिक महायज्ञ में अपनी पूरी भागीदारी निभाएगा, तब आलोचकों की तमाम नकारात्मक बातें स्वतः ही अर्थहीन साबित हो जाएंगी। इस प्रकार के तीखे राजनीतिक और आर्थिक बयानों से यह संदेश भी पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि सरकार किसी भी बाहरी या आंतरिक दबाव के आगे झुकने वाली नहीं है, बल्कि वह अपनी नीतियों के बल पर देश को दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्तियों की श्रेणी में शीर्ष पर पहुंचाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।