मतदाता सूची में धांधली का आरोप
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में राज्य की मतदाता सूचियों को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। गोमती नगर क्षेत्र में पूर्व मंत्री विद्या चौधरी के निवास स्थान पर भेंट करने के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में यह दावा किया कि मतदाता सूचियों में बड़ी त्रुटियां मौजूद हैं। उनके अनुसार, सूची के पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद इसमें काफी अनियमितताएं हैं। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर एक ही व्यक्ति के नाम पर एक से अधिक वोट दर्ज किए गए हैं, जो चुनावी निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगाता है। अखिलेश यादव का कहना है कि इन खामियों को चुनाव आयोग ने भी स्वीकार किया है, लेकिन आयोग इसे केवल छोटी-मोटी चूक मानकर नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने इसे बहुत बड़ी गड़बड़ी बताते हुए कहा कि यह सब लोकतंत्र के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है और इस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि कोई भी नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे या फर्जी मतदान न हो सके।
आयोग पर पक्षपात का गंभीर इल्जाम
अखिलेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी के निर्देशानुसार कार्य कर रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि आयोग का रवैया भाजपा की सुविधा के अनुरूप है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की शुचिता प्रभावित हो रही है। अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने 24 अक्टूबर को होने वाले विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान के दौरान अपने समर्थकों को सक्रिय होने का आह्वान किया है। उन्होंने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक प्रहरी वर्ग के कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए हैं कि वे उस दिन अपने-अपने बूथों पर पूरी तरह मुस्तैद रहें। उनका मुख्य उद्देश्य मतदाताओं की हर संभव सहायता करना और सूची में हो रही गलतियों को दुरुस्त करने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। अखिलेश ने कहा कि यदि मतदाता स्वयं और कार्यकर्ता सजग रहेंगे, तो ही इन गड़बड़ियों को रोका जा सकेगा। उन्होंने अपने पार्टी के पीडीए प्रहरियों से अपेक्षा की है कि वे उस विशेष दिन पर पूरी जिम्मेदारी के साथ बूथों की निगरानी का कार्य संभालें।
जातिगत भेदभाव और भावी राजनीतिक विकल्प
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जातिगत आधारित भेदभाव पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि अब विदेशी भी हमारे समाज में व्याप्त जातिवाद का प्रत्यक्ष अनुभव साझा कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि पीडीए समाज का कोई भी सदस्य, चाहे वह जेल की चहारदीवारी के भीतर हो या बाहर, उसे हर कदम पर जातिगत नाम के कारण अपमान और पीड़ा का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, इस तरह की असमानता और गैर-बराबरी समाज की जड़ों में समाई हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस गहरी सामाजिक समस्या का एकमात्र स्थायी समाधान केवल पीडीए समर्थित सरकार का गठन ही है। अखिलेश ने यह भी संकेत दिया कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वे काफी गंभीर हैं और जल्द ही अपनी रणनीति को और अधिक धार देंगे। आजम खां से मुलाकात की योजना और उनकी हालिया सक्रियता के बीच उनके इस बयान को आगामी राजनीतिक लड़ाई की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है, जिसका लक्ष्य जातिगत आधार पर पीड़ित समाज को उनका अधिकार दिलाना है।