विदेशी ताकतों और साजिश पर बयान
मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उपमुख्यमंत्री और शिवसेना के मुख्य नेता एकनाथ शिंदे ने कांग्रेस तथा इंडिया गठबंधन पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने दावा किया कि कुछ विदेशी ताकतें भारत को अस्थिर करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। विपक्षी दलों द्वारा किए जाने वाले आंदोलन इसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं। शिंदे ने मंगलवार को संवाददाताओं के सामने यह बात कही और विपक्ष की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार चुनावी हार मिलने के कारण विपक्ष निराश हो चुका है। अब उन्हें लोकतांत्रिक माध्यमों से देश की सत्ता हासिल करना बेहद मुश्किल लग रहा है। इस निराशा और सत्ता की बेचैनी के चलते ही देश के भीतर अशांति फैलाने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं। नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका के जन आंदोलनों का उदाहरण देने वाले विपक्षी नेताओं से उन्होंने देश की जनता को संदेश देने के बारे में पूछा। हालांकि, अपनी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने इन गंभीर आरोपों के समर्थन में कोई भी ठोस सबूत पेश नहीं किया। इसके बावजूद उन्होंने विपक्ष के रुख को देश की शांति और व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा करार दिया है। उनके इन बयानों से राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छिड़ गई है और विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट मार्च पर तीखी प्रतिक्रिया
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विपक्षी नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट की तरफ निकाले गए मार्च की कड़ी निंदा की। उन्होंने इस आंदोलन को भारतीय इतिहास का एक काला दिन बताया और विपक्षी नेताओं से माफी की मांग की। सर्वोच्च न्यायिक संस्था की ओर याचिका दाखिल करने के बहाने मार्च निकालना न्यायपालिका का सीधा अपमान है। शिंदे ने कहा कि राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं ने इस प्रकार का कृत्य करके देश की लोकतांत्रिक नींव को कमजोर किया है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष हमेशा संविधान को हाथ में लेकर घूमता है, लेकिन असल में वह संवैधानिक संस्थाओं के प्रति गहरा अविश्वास पैदा कर रहा है। राहुल गांधी द्वारा इस पूरे आंदोलन को शिवतांडव कहे जाने पर भी उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह कोई शिवतांडव नहीं है, बल्कि केवल सत्ता के भूखे और बेचैन नेताओं का अनावश्यक हंगामा है। धार्मिक प्रतीकों और शब्दों के इस प्रकार के इस्तेमाल को लेकर उन्होंने राहुल गांधी की जमकर आलोचना की। इसके अलावा, उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ विपक्षी नेताओं द्वारा दी गई कथित टिप्पणियों और चेतावनियों पर भी अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। न्यायपालिका जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं पर इस तरह के हमले देश के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश के 140 करोड़ नागरिकों को विपक्ष के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग करनी चाहिए।
चुनावी हार और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विपक्ष को लगातार तीन बार चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है। इस बात का जिक्र करते हुए शिंदे ने कहा कि विपक्ष की बौखलाहट अब खुलकर सामने आने लगी है। चुनाव आयोग और ईवीएम की कार्यप्रणाली पर बार-बार सवाल उठाना विपक्ष की पुरानी आदत बन चुकी है। हालांकि, इन सभी गंभीर आरोपों के समर्थन में उनके पास कभी भी पर्याप्त और पुख्ता सबूत नहीं होते हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में सवाल उठाया कि यदि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर संदेह है, तो क्या उनके इस कार्यकाल में जीते गए राज्यों पर भी सवाल उठेंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि तेलंगाना, कर्नाटक, केरलम और तमिलनाडु जैसे राज्यों में विपक्षी दल भी इसी आयोग के दौर में चुनाव जीते हैं। क्या विपक्षी दलों को अपनी उन जीतों को भी अवैध या संदिग्ध करार देना चाहिए। शिंदे ने चेतावनी दी कि संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज पर बेवजह सवाल उठाना और जनता के मन में उनके प्रति अविश्वास भरना देशहित में नहीं है। इस प्रकार की प्रवृत्तियां देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने को अंदर से खोखला कर देती हैं। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे ऐसी ताकतों की साजिशों को समझें जो देश में अनावश्यक रूप से अराजकता का माहौल तैयार करना चाहती हैं। प्रशासन और न्यायपालिका को कमजोर करने वाले ऐसे राजनीतिक कदमों का कड़ा विरोध किया जाना चाहिए ताकि देश में कानून का राज सुरक्षित रह सके।