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राजनीति

बड़ा बयान: आरक्षण समाप्त करने की मांग उठाने वालों पर चले राजद्रोह का मुकदमा, रामदास अठावले की सख्त मांग

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने की वकालत करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि ऐसे लोगों पर राजद्रोह का मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

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Ankit Yadav
25 अग 2026, 11:47
बड़ा बयान: आरक्षण समाप्त करने की मांग उठाने वालों पर चले राजद्रोह का मुकदमा, रामदास अठावले की सख्त मांग
देश की राजनीति में आरक्षण के मुद्दे पर एक बार फिर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। इसी क्रम में केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने एक कड़ा बयान देते हुए अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जो लोग इस देश से आरक्षण की व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करने की मांग कर रहे हैं, उनके खिलाफ सरकार और प्रशासन को सख्त से सख्त रुख अपनाना चाहिए। अठावले के अनुसार, ऐसी मांगें समाज के एक बड़े वर्ग के अधिकारों पर सीधा हमला हैं और देश की एकता व सामाजिक न्याय के बुनियादी ढांचे को कमजोर करती हैं।

आरक्षण के विरोधियों पर कानूनी शिकंजा

अठावले का मानना है कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत मिलने वाले आरक्षण को हटाने की बात करना संविधान विरोधी कृत्य है। इसलिए, जो भी व्यक्ति या संगठन सार्वजनिक रूप से आरक्षण को समाप्त करने की वकालत करता है, उसके ऊपर राजद्रोह यानी देशद्रोह के तहत मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर आरक्षण के दायरे, उसकी समीक्षा और इसके भविष्य को लेकर अक्सर बहस छिड़ती रहती है। दलित और पिछड़े वर्गों के सशक्तिकरण के लिए आरक्षण को अनिवार्य बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ उठने वाली हर आवाज का कड़ा मुकाबला किया जाएगा। विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की तरफ से इस प्रकार के बयानों पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक तरफ जहां कई दलित नेता और कार्यकर्ता अठावले के इस बयान का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ राजनीतिक हलकों में इसकी तीखी आलोचना भी हो रही है। जानकारों का कहना है कि आगामी चुनावी माहौल और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए इस तरह के बयान राजनीतिक तापमान को और अधिक बढ़ा सकते हैं। भविष्य में इस मुद्दे पर सियासी सरगर्मी और तेज होने के पूरे आसार हैं। विभिन्न मंचों से आरक्षण के पक्ष और विपक्ष में बयानबाजी का दौर आगे भी जारी रहने की संभावना है। प्रशासन और पुलिस अधिकारियों का इस पर क्या रुख रहता है और क्या वाकई ऐसे बयानों के आधार पर किसी कानूनी कार्रवाई की रूपरेखा बनती है, यह आने वाले दिनों में और अधिक स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल, रामदास अठावले की इस दो टूक टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है जिस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
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