कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
सऊदी अरब में बांग्लादेशी महिला कामगार कितनी सुरक्षित हैं?      रिलायंस की रिफाइनरी में रुबियो का जोरदार स्वागत, अंबानी संग कई अहम मुद्दों पर हुई बात      स्पीकर ओम बिरला की दो टूक, अगर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रस्ताव...      'पहले ही बना दी बैड बॉय की इमेज', नेहा बोरा केस में HC की टिप्पणी पर सरकार की दलील- क्या ये दूध के धुले      अनशन खत्म कराने डिप्टी CM ने लिए थे 500 करोड़? एकनाथ शिंदे vs मनोज जरांगे के बीच अब क्या पंगा      देश के 6 राज्यों में आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश की चेतावनी, ऑरेंज अलर्ट जारी; उत्तर भारत में आज कैसा रहेग      दो चुनाव आयुक्तों की शिकायत पर कैबिनेट सचिव ने क्यों नहीं लिया एक्शन, RTI में खुलासा      Tiger Shroff Attack Case में बड़ा खुलासा, वारदात से पहले शूटरों ने की थी बंदूक चलाने की प्रैक्टिस, हुआ था म     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
राजनीति

बदला सियासी रुख: तीन नहीं बल्कि सभी 403 सीटों पर अखिलेश यादव की नजर

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक नया बयान जारी किया है। इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश के आगामी राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी अब उच्च सदन के चुनाव में तीसरे प्रत्याशी को उतारने की योजना से पीछे हटती नजर आ रही है।

A
Ankit Yadav
06 अक्ट 2026, 12:00
बदला सियासी रुख: तीन नहीं बल्कि सभी 403 सीटों पर अखिलेश यादव की नजर

सोशल मीडिया पोस्ट से मची राजनीतिक हलचल

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा इंटरनेट मीडिया मंच एक्स पर एक नया संदेश साझा किया गया है। इस संदेश के सामने आते ही लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। उन्होंने अपने आधिकारिक खाते से लिखा कि अब उनकी निगाहें तीन पर नहीं बल्कि चार सौ तीन पर केंद्रित हैं। उनके इस कथन को सीधे तौर पर आगामी राज्यसभा चुनाव और भविष्य की चुनावी रणनीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि पार्टी प्रमुख का यह रुख राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। इस ताजा घटनाक्रम के बाद से पार्टी कार्यकर्ताओं और अन्य राजनीतिक दलों के बीच तरह-तरह की चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक विश्लेषक इस बात का आकलन कर रहे हैं कि इस बयान के दूरगामी परिणाम क्या हो सकते हैं। सपा नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका मुख्य फोकस अब पूरी तरह से विधानसभा की सभी सीटों पर रहेगा। इस प्रकार की रणनीति से विपक्षी दलों की चाल पर भी नजर रखने में आसानी होगी और संगठन को मजबूती मिलेगी।

राज्यसभा चुनाव और आंकड़ों का पूरा गणित

उत्तर प्रदेश में उच्च सदन की दस सीटों के लिए आगामी चुनाव संपन्न होना है। निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक किसी भी दल को एक प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए कम से कम सैंतीस विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है। वर्तमान समय में समाजवादी पार्टी के पास अपने अठानवे विधायक मौजूद हैं। यदि जेल में बंद पार्टी विधायक रमाकांत यादव को मतदान में भाग लेने की अनुमति नहीं मिलती है तो यह संख्या घटकर सत्तानवे रह सकती है। इसके विपरीत यदि कांग्रेस के दो विधायकों का समर्थन मिल जाता है तो यह कुल संख्या निन्यानवे तक पहुंच सकती है। इस स्थिति में पार्टी अपने दो उम्मीदवारों को आसानी से जिता सकती है जिसके लिए चौहत्तर मतों की जरूरत होती है। यदि पार्टी अपना तीसरा उम्मीदवार भी मैदान में उतारती तो तीनों सीटों को जीतने के लिए कुल एक सौ ग्यारह प्रथम वरीयता के वोटों की दरकार होती। दो सीटों के बाद पार्टी के पास लगभग पच्चीस वोट शेष बचते जिन्हें तीसरी सीट के लिए बारह अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती। इस कमी को पूरा करने के लिए सुभासपा के तीन विधायकों, कुछ बागी सदस्यों, राष्ट्रीय लोकदल, अपना दल और अन्य गैर भारतीय जनता पार्टी दलों के विधायकों के समर्थन पर विचार चल रहा था। लेकिन अब इन तमाम गणितीय समीकरणों के बीच पार्टी तीसरी सीट के लिए जोखिम उठाने के मूड में दिखाई नहीं दे रही है।

रणनीति में बदलाव और आगामी विधानसभा पर फोकस

अखिलेश यादव ने अपनी पुरानी रणनीति में संशोधन करते हुए स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि वे अब उच्च सदन की तीसरी सीट के लिए अनावश्यक जोर आजमाइश नहीं करेंगे। पूर्व में पार्टी प्रमुख यह कह चुके थे कि तीसरा उम्मीदवार तभी मैदान में उतारा जाएगा जब जीत के लिए आवश्यक विधायकों का पूरा संख्या बल उपलब्ध हो। ताजा बयानों के बाद अब यह लगभग साफ होता जा रहा है कि दल उच्च सदन के मुकाबले अपनी पूरी ताकत आने वाले विधानसभा चुनाव पर लगाएगा। वर्तमान में उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल सदस्य संख्या तीन सौ छियानवे है और सदन की कुल क्षमता चार सौ तीन सीटों की है। पार्टी का पूरा ध्यान अब राज्य की सभी चार सौ तीन विधानसभा सीटों को मजबूत करने पर केंद्रित हो गया है। इस नए राजनीतिक रुख से यह भी स्पष्ट होता है कि पार्टी नेतृत्व आगामी बड़ी लड़ाइयों के लिए अपनी ऊर्जा को बचाकर रखना चाहता है। पार्टी के इस कदम से उच्च सदन के चुनाव का मुकाबला अब काफी हद तक सीधा और सुगम हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस रणनीति से क्षेत्रीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को सीधा संदेश मिलेगा। वे अब विधानसभा स्तर पर अपनी तैयारियों को और अधिक धार दे सकेंगे जिससे आने वाले समय में पार्टी को व्यापक स्तर पर लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज