लेनदेन शुल्कों के निर्धारण पर बड़ा स्थगन आदेश
केंद्र सरकार के संबंधित महकमे ने डिजिटल भुगतान माध्यमों पर लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट के नियम में संशोधन किया है। इस प्रावधान को निर्धारित तिथि यानी 15 अक्टूबर से शुरू नहीं किया जाएगा। यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने आज यह अहम निर्णय लिया है कि कुछ खास श्रेणियों के पर्सन-टू-मर्चेंट भुगतानों पर यह प्रभार अब आगामी पर्वों के समापन के बाद ही प्रभावी होगा। व्यापारियों की तरफ से लगातार मिल रहे ज्ञापनों और अनुरोधों का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों ने यह बदलाव किया है। इस नई व्यवस्था के तहत तय किया गया था कि दो हजार रुपये से अधिक के डिजिटल भुगतानों पर शून्य दशमलव चार शून्य प्रतिशत का यह शुल्क लगाया जाएगा। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा चौदह सितंबर दो हजार छब्बीस को इस संबंध में एक निर्देशिका जारी की गई थी जिसके अगले दिन विस्तृत परिपत्र भी सार्वजनिक कर दिया गया था। इस प्रकार से लागू होने वाले इस नए वित्तीय फ्रेमवर्क का उद्देश्य डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को नियंत्रित करना था जिसे अब आंशिक रूप से रोक दिया गया है।
व्यापार जगत की मांग और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
देशभर के व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री संगठन की तरफ से इस वित्तीय प्रभार को वापस लेने के लिए निरंतर अनुरोध किया जा रहा था। उनका तर्क था कि इस प्रकार के अतिरिक्त शुल्कों से व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस बीच राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भी इस विषय पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है। कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से मौजूदा प्रशासन पर अपनी बात रखी। उन्होंने अपने बयान में याद दिलाया कि इसी वर्ष छह अगस्त को तथा उसके चार दिन पश्चात संसद सत्र के दौरान वित्त मंत्री महोदय ने किसी भी प्रकार के अतिरिक्त प्रभार लगाए जाने की संभावना से स्पष्ट इनकार कर दिया था। इसके बावजूद पंद्रह सितंबर को इस दिशा में आधिकारिक घोषणा कर दी गई जिसे उन्होंने नीतिगत पलटाव बताया। विपक्षी नेताओं का यह भी कहना है कि जनता और व्यापारियों के दबाव के कारण ही सरकार को अपने कदमों पर पुनर्विचार करने के लिए विवश होना पड़ा है और अब यह देखना बाकी है कि पर्वों के बाद इस मामले में क्या निर्णय लिया जाता है।
व्यापारियों के लिए रियायतें और आगामी रूपरेखा
इस संपूर्ण वित्तीय ढांचे के अंतर्गत कुछ विशेष क्षेत्रों और लघु स्तर के दुकानदारों को पूरी तरह से छूट प्रदान की गई है। ऐसे दुकानदार जो अपनी वाणिज्यिक इकाइयों पर लगाए गए क्यूआर कोड के माध्यम से प्रतिमाह एक लाख रुपये तक की राशि प्राप्त करते हैं, उनके लिए यह नया प्रभार शून्य रखा गया है। इसके अलावा नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के निर्देशों के अनुसार पांच प्रमुख श्रेणियों को एक समान फ्लैट रेट मॉडल के दायरे में रखा गया है। इन सभी श्रेणियों में भुगतान की कुल राशि चाहे जितनी भी हो, प्रति लेनदेन पांच रुपये का निर्धारित शुल्क ही लागू रहेगा। इन चयनित क्षेत्रों में ईंधन बिक्री केंद्र, रेलवे से जुड़े डिजिटल भुगतान, बीमा पॉलिसियों के प्रीमियम, दूरसंचार सेवाएं और बिजली तथा पानी जैसे उपभोक्ता उपयोगिता बिलों का भुगतान शामिल किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस रियायती दर की वजह से आवश्यक सेवाओं से जुड़े लेनदेन करने वाले आम नागरिकों और दुकानदारों पर अत्यधिक वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। आगामी समय में जब यह नीति पर्वों के बाद फिर से लागू होगी, तब इसकी सटीक तिथि की घोषणा अलग से की जाएगी।