गवर्नमेंट प्रेस में मतपत्रों की छपाई संपन्न
प्रयागराज में एमएलसी चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में गवर्नमेंट प्रेस द्वारा इस बार भारी मात्रा में मतपत्र तैयार किए गए हैं। इन मुद्रित मतपत्रों में से स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 15 लाख बैलेट पेपर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव के लिए तीन लाख बैलेट पेपरों की छपाई पूरी की गई है। गवर्नमेंट प्रेस के प्रधान सहायक ध्रुव नारायण ने इस बात की जानकारी दी है कि इन सभी छपे हुए मतपत्रों का इस्तेमाल स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के विधान परिषद चुनाव में किया जाएगा। मतदान की प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और सुगमता के साथ संपन्न कराने के लिए इन बैलेट पेपरों की छपाई का कार्य समय रहते पूरा कर लिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
संबंधित जिलों में मतपत्र भेजने की प्रक्रिया
छपाई का कार्य पूर्ण होने के उपरांत गवर्नमेंट प्रेस से इन मतपत्रों को संबंधित जिलों में भेजने की प्रक्रिया को तुरंत शुरू कर दिया गया है। प्रयागराज जनपद के साथ-साथ इसके तमाम पड़ोसी जिलों में भी बैलेट पेपर भेजे जा रहे हैं ताकि निर्वाचन के दौरान इनकी किसी भी प्रकार से कोई कमी न रहे। मतदान के दिन सभी केंद्रों पर इनकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए यह प्रशासनिक कदम उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार चुनाव की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही बैलेट पेपरों की छपाई और उनके वितरण की यह पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। ध्रुव नारायण ने बताया है कि मतपत्रों की छपाई हमेशा पंजीकृत मतदाताओं की कुल संख्या से अधिक की जाती है ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति या अतिरिक्त आवश्यकता के समय मतपत्रों की कोई कमी न पड़े। हर एक प्रत्याशी के अनुपात को ध्यान में रखते हुए लगभग तीन लाख बैलेट पेपरों की छपाई विशेष तौर पर की गई है।
पिछले चुनावों की तुलना में मतदाताओं की वृद्धि
पिछले एमएलसी चुनाव के मुकाबले इस बार बैलेट पेपरों की संख्या में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है जो पिछले आंकड़े की लगभग दोगुनी है। इस बार स्नातक चुनाव में भाग लेने वाले मतदाताओं की संख्या में अभूतपूर्व और रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। अकेले इलाहाबाद झांसी क्षेत्र की बात करें तो इस बार वहां लगभग 2070000 वोटर अपनी मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतदाताओं की इसी भारी संख्या को ध्यान में रखते हुए ही बैलेट पेपरों की संख्या 10 लाख से बढ़ाकर सीधे 18 लाख के आंकड़े तक पहुंचाई गई है। चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों द्वारा की गई इन व्यवस्थाओं से यह स्पष्ट होता है कि आगामी मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और सुचारू तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद और तैयार है।