शिक्षक एमएलसी चुनाव का चुनावी परिदृश्य
शिक्षक एमएलसी चुनाव के इतिहास में यह पहला अवसर है जब भारतीय जनता पार्टी अपना स्वयं का उम्मीदवार मैदान में उतार रही है। पिछली बार वर्ष 2020 के दौरान भाजपा ने अपना प्रत्याशी घोषित करने के स्थान पर ध्रुव कुमार त्रिपाठी को समर्थन दिया था, जो कि शर्मा गुट से जुड़े थे। वर्तमान चुनावी दंगल में ध्रुव कुमार त्रिपाठी भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर मुकाबले के दौरान भाजपा के पूर्व नेता डॉ। संजयन त्रिपाठी ने बागी तेवर अपनाते हुए नामांकन दाखिल किया। नामांकन के बाद समाजवादी पार्टी ने तुरंत कदम उठाते हुए डॉ। संजयन त्रिपाठी को अपनी सदस्यता प्रदान कर दी और उन्हें अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद समाजवादी पार्टी ने इस चुनाव को अपनी साख का सवाल बना लिया है। दोनों दलों की सक्रियता के कारण चुनावी वातावरण पूरी तरह से गर्मा गया है और राजनीतिक दलों ने इस शिक्षक सीट के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
दोनों पार्टियों द्वारा प्रचार की रणनीति
समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2020 की तुलना में इस बार कहीं अधिक आक्रामक रुख अपनाते हुए चुनाव में हिस्सा लिया है। पिछले चुनाव में पार्टी को महज ढाई हजार वोट ही प्राप्त हुए थे और उनके प्रत्याशी अवधेश यादव कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सके थे। हालांकि, इस बार सपा ने हर जिले में अलग प्रभारी और सह-प्रभारी तैनात किए हैं, ताकि हर वर्ग के वोटरों तक पहुंच बनाई जा सके। पार्टी अपने वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों को प्रचार कार्य में लगा चुकी है, जहां जातीय समीकरणों के आधार पर नेताओं की ड्यूटी लगाई गई है। दूसरी तरफ, भाजपा ने भी सक्रियता में कोई कसर नहीं छोड़ी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में गोरखपुर में शिक्षक सम्मेलन को संबोधित किया है, जिसमें सत्रह जिलों के शिक्षकों ने शिरकत की। सत्रह अक्टूबर की रात रानीडीहा स्थित भाजपा कार्यालय पर प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सांसद और विधायकों के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया। इस बैठक में प्रदेश के सह-प्रभारी भी मौजूद रहे और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वयं विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं।
राजनीतिक प्रतिष्ठा और भविष्य के संकेत
आगामी वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के दृष्टिकोण से शिक्षक एमएलसी का यह चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पत्रकार आलोक दूबे के अनुसार, योगी आदित्यनाथ का कार्यक्षेत्र होने की वजह से भाजपा इस सीट को अपनी गरिमा से जोड़कर देख रही है। निर्वाचन क्षेत्र के जिलों में भाजपा का आधार मजबूत माना जाता है, जिसे बचाने की कोशिश पार्टी कर रही है। सपा का प्रयास है कि इस सीट पर जीत दर्ज करके राज्य स्तर पर एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया जाए। यदि सपा यहां विजयी होती है, तो उनके इस दावे को मजबूती मिलेगी कि ब्राह्मण समुदाय पार्टी के साथ जुड़ा है। वरिष्ठ पत्रकार डीबीबी मिश्र का मानना है कि यह चुनाव आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जनता के मतदान व्यवहार को मापने की एक एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। दोनों दलों के उम्मीदवार ब्राह्मण होने के कारण जातिगत आक्रोश का मुद्दा गौण हो गया है। चुनाव परिणाम आने के बाद जीतने वाली पार्टी को भविष्य के विधानसभा चुनाव के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल हो जाएगी, जिससे यह मुकाबला दोनों दलों के लिए करो या मरो की स्थिति जैसा बन गया है।