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राजनीति ब्रेकिंग

गहलोत का हमला: राजस्थान का आधा हिस्सा सूख रहा है और सरकार सो रही

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की भाजपा सरकार पर गंभीर निशाना साधते हुए कहा है कि प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट में है और सरकार गहरी नींद में सो रही है।

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Ankit Yadav
17 सित 2026, 15:38
गहलोत का हमला: राजस्थान का आधा हिस्सा सूख रहा है और सरकार सो रही
राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर पानी और सूखे के संकट को लेकर गर्माहट देखने को मिल रही है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने मौजूदा भारतीय जनता पार्टी सरकार पर करारा प्रहार किया है। उनका यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब आम जनता कई प्रकार की बुनियादी समस्याओं और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है। गहलोत के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और विपक्षी दल सरकार को घेरने की कोशिश में जुट गए हैं।

सूखे की मार और प्रशासनिक उदासीनता

अपने तीखे बयान में पूर्व सीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदेश की भौगोलिक स्थिति का लगभग आधा हिस्सा गंभीर सूखे की स्थिति से जूझ रहा है। पानी की कमी, फसल खराब होने की आशंका और ग्रामीण इलाकों में बढ़ते संकट के बावजूद राज्य का प्रशासन और शासन चलाने वाले लोग पूरी तरह से उदासीन बने हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आम जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, लेकिन मंत्रियों और अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। इस तरह के हालात ने किसानों और आम नागरिकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं, जिन्हें वक्त पर कोई राहत या मदद नहीं मिल पा रही है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आगे की रणनीति

अशोक गहलोत के इस बयान के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस पार्टी के अन्य नेता भी अब इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी कर रहे हैं। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में विपक्ष इस सूखे और बदइंतजामी के मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर सदन तक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर सकता है। दूसरी ओर, भाजपा सरकार की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक और ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन अंदरखाने राजनीतिक बैठकों का दौर शुरू हो चुका है ताकि इन आरोपों का माकूल जवाब दिया जा सके। जनता अब यह उम्मीद लगाए बैठी है कि राजनीतिक दलों की इस बयानबाजी से ऊपर उठकर धरातल पर कुछ राहत के काम शुरू होंगे। पानी और कृषि संकट से जूझ रहे इलाकों में यदि जल्द ही विशेष राहत पैकेज या प्रशासनिक सहायता नहीं पहुंचाई गई, तो स्थिति और भी अधिक भयावह हो सकती है। फिलहाल, पूर्व सीएम के इस बयान ने राज्य की प्रशासनिक कार्यशैली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है, जिसका जवाब देना मौजूदा सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
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