राजधानी दिल्ली में विपक्षी दलों का महामंथन
नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आज 30 सितंबर को इंडिया ब्लॉक के घटक दलों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में भाग लेने के लिए बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव मंगलवार रात ही दिल्ली पहुंच गए थे। विपक्षी दलों के इस जमावड़े का मुख्य उद्देश्य देश में चल रही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की बारीकियों पर विचार करना है। इस चर्चा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण जिसे संक्षिप्त में एसआईआर कहा जाता है, उस पर विशेष ध्यान केंद्रित रहेगा। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और वीवीपैट मशीनों के उपयोग के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत विमर्श होना प्रस्तावित है। विपक्षी नेताओं का यह समूह आने वाले समय के लिए अपनी संयुक्त चुनावी रणनीति तैयार करेगा। बैठक के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और निष्पक्षता को लेकर विपक्षी दल किस प्रकार आगे की कार्रवाई तय करें और जनता के बीच इन मुद्दों को कैसे प्रमुखता से रखा जाए।
तेजस्वी यादव ने लगाए चुनाव प्रक्रिया में धांधली के आरोप
दिल्ली रवाना होने से पहले पटना में संवाददाताओं के समक्ष तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव के दौरान वोटों की चोरी करके भारतीय जनता पार्टी को जीत दिलाने का सिलसिला सबसे पहले बिहार से शुरू किया गया था, जिसे बाद में पूरे देश में लागू कर दिया गया। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि वर्तमान में संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग करके लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर दर्ज की गई आपत्तियों का उल्लेख किया। तेजस्वी के अनुसार, इन आपत्तियों का सामने आना एक गंभीर लोकतांत्रिक संकट की ओर संकेत करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है और केवल उन्हें हटाने से यह बड़ी समस्या हल नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि चुनाव आयोग के पदाधिकारी मनमानी करेंगे तो उन पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और ज्ञानेश कुमार को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए ताकि संस्था की विश्वसनीयता बची रहे।
संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और भविष्य की रणनीति
विपक्षी दलों की आज की बैठक में मुख्य रूप से ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया पर मंथन होने की संभावना है। इस संबंध में संसद के भीतर कोई ठोस प्रस्ताव लाने की संभावनाओं पर भी विपक्षी नेता गंभीरता से विचार कर सकते हैं। तेजस्वी यादव ने अपने बयान में कहा कि कानून में बदलाव कर दिए गए हैं ताकि चुनाव आयोग के कामकाज में मनमानी को संरक्षण प्राप्त हो सके। उन्होंने देश की जनता से अपील की है कि भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए एकजुट होकर प्रयास करना अनिवार्य है। विपक्षी खेमे का आरोप है कि चुनाव जीतने के लिए केंद्र सरकार संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रख रही है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि एक व्यक्ति को हटाया भी जाता है तो भाजपा ऐसे कई और लोगों को लाकर अपनी साजिश जारी रखेगी। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विपक्ष का एक बड़ा वर्ग लगातार चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों के फैसलों पर सवाल उठाता रहा है। अब देखना यह है कि आज की इस उच्च-स्तरीय मंत्रणा में इंडिया गठबंधन कोई साझा और प्रभावी कार्यक्रम तय कर पाता है या नहीं।