जेवर हवाई अड्डे के नामकरण की प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश के जेवर क्षेत्र में निर्मित हो रहे नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम अब नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, नोएडा-जेवर होगा। इस बदलाव के संबंध में राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बीते 9 अक्टूबर को अपनी कैबिनेट बैठक के दौरान आधिकारिक प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। मुख्यमंत्री ने लखनऊ में इस बड़े नीतिगत फैसले की जानकारी सार्वजनिक की है। यह निर्णय प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्षों की लंबी सेवा अवधि पूरी होने के उपलक्ष्य में लिया गया है। जेवर में विकसित किया जा रहा यह एयरपोर्ट राज्य की अत्यंत महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में गिना जाता है। इस नाम परिवर्तन के साथ ही प्रशासनिक स्तर पर आधिकारिक औपचारिकताओं का दौर शुरू हो गया है, जिसे आने वाले समय में अंतिम रूप दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व और उनके मार्गदर्शन के प्रति यह एक आभार प्रदर्शन का तरीका है। हवाई अड्डे का यह नया नाम सरकारी दस्तावेजों और भविष्य के सभी सूचना बोर्डों पर अंकित किया जाना प्रस्तावित है।
प्रधानमंत्री के नाम पर अन्य संस्थान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर भारत में पहले भी कई प्रमुख सार्वजनिक स्थल और संस्थान स्थित हैं, जिनकी चर्चा इस ताजा घोषणा के बाद फिर से तेज हो गई है। गुजरात के अहमदाबाद में स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम इसका सबसे प्रमुख उदाहरण है, जो दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम के तौर पर वैश्विक पहचान रखता है। फरवरी 2021 में उद्घाटन किए गए इस स्टेडियम में एक साथ 1.32 लाख दर्शक बैठ सकते हैं, जिसे पहले मोटेरा या सरदार पटेल स्टेडियम के नाम से जाना जाता था। इसी शहर के मणिनगर इलाके में नरेंद्र मोदी मेडिकल कॉलेज भी स्थित है, जो अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के मेडिकल एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है। इस शिक्षण संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर भी यही नाम दर्ज है। इसके अलावा, सिक्किम में भी एक सड़क का नाम नरेंद्र मोदी मार्ग होने संबंधी खबरें सामने आती रही हैं, हालांकि सरकार की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। इन स्थलों की सूची में अब उत्तर प्रदेश का जेवर एयरपोर्ट भी जुड़ने की कतार में शामिल हो गया है।
नाम बदलने की संवैधानिक औपचारिकताएं
भारत में किसी भी हवाई अड्डे का नाम बदलने की प्रक्रिया केवल राज्य कैबिनेट के प्रस्ताव तक सीमित नहीं होती है, बल्कि इसमें कई अन्य चरण भी शामिल होते हैं। किसी भी हवाई अड्डे के नामकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा भेजा गया प्रस्ताव केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही प्रभावी हो पाता है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने केवल इस नामकरण को अपनी सैद्धांतिक स्वीकृति दी है, जिसके बाद आगे की वैधानिक प्रक्रियाएं शुरू की जाएंगी। इस तरह के नाम परिवर्तन के बाद भविष्य में राज्य सरकार को आधिकारिक रिकॉर्ड, मानचित्रों, सार्वजनिक सूचनाओं और दिशा-निर्देश बोर्डों में जरूरी बदलाव करने होंगे। जेवर एयरपोर्ट के संदर्भ में अभी केवल राज्य स्तरीय मंत्रिमंडल की घोषणा ही मुख्य बिंदु है, जबकि नाम परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया के अगले कदम काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। सरकारी कामकाज के नियमों के अनुसार, नाम में संशोधन के बाद ही इसे अंतिम रूप से लागू माना जाएगा और तब तक इस बुनियादी ढांचे की पहचान से जुड़े दस्तावेजों में राज्य के प्रशासन द्वारा आवश्यक सुधार किए जाएंगे।