भोपाल में गृह मंत्री का बड़ा ऐलान
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित भेल दशहरा मैदान पर ग्यारह जिलों के लगभग पैंतीस हजार गोपालक एकत्र हुए थे। इस बड़े सम्मेलन के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रदेश को इकतीस दिसंबर वर्ष 2029 तक नशा मुक्त बनाने की घोषणा की। इस कार्यक्रम में उन्होंने गोशालाओं के विकास के लिए कुल एक सौ एक करोड़ रुपये की राशि प्रदान की। इसके अलावा उज्जैन शहर में दो सौ पचपन करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले आधुनिक डेयरी प्लांट का डिजिटल माध्यम से भूमिपूजन भी किया गया। राज्य को नशीले पदार्थों के जाल से बाहर निकालने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक तय की गई थी। हालांकि कुछ जरूरी कारणों के चलते यह विशेष बैठक उस समय टल गई लेकिन शासन स्तर पर आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने का काम लगातार जारी रहा। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो और राजस्व आसूचना निदेशालय के आंकड़े बताते हैं कि यह राज्य अवैध पदार्थों की तस्करी के बड़े केंद्रों में शामिल हो चुका है।
अवैध प्रयोगशालाओं और तस्करी के तरीके
सरकारी आंकड़ों और हालिया छापों से यह बात सामने आई है कि राज्य के भीतर नशीली दवाओं के अवैध निर्माण का जाल बहुत दूर तक फैला हुआ है। औद्योगिक इलाकों से लेकर दूरदराज के गांवों तक में पुलिस और जांच एजेंसियों ने अवैध रूप से चल रही कई गुप्त प्रयोगशालाओं का भंडाफोड़ किया है। अब तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में ऐसी सत्रह गुप्त प्रयोगशालाओं का पर्दाफाश किया जा चुका है जहां इन खतरनाक पदार्थों का निर्माण किया जाता था। कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए अपराधी लगातार तस्करी के नए और अजीब तरीके ढूंढ रहे हैं। हाल ही में सामने आए तीन मामलों से यह स्पष्ट हुआ है कि तस्कर वाहन के टायर की स्टेपनी के अंदर और कपड़ों जैसे सलवार कुर्ते के भीतर छिपाकर इन चीजों की ढुलाई करते हैं। भोपाल शहर में एक बार तो एक हजार आठ सौ करोड़ रुपये मूल्य की नशीली दवाओं की बड़ी फैक्ट्री का भी खुलासा हुआ था। इन अपराधियों पर नकेल कसने के लिए अधिकारी आदतन नशा तस्करों के खिलाफ सख्त निवारक कानूनों का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं।
पड़ोसी राज्यों के साथ संयुक्त कार्रवाई
इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए अब केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और राज्य के मुख्यमंत्री ने आपसी समन्वय को और अधिक मजबूत करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शनिवार के दिन केंद्रीय अधिकारियों के साथ मिलकर कानून व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा की। इस उच्च स्तरीय मंथन के दौरान यह तय किया गया कि पूरे आपराधिक सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा। केंद्रीय गृह सचिव ने मध्य प्रदेश की सीमाओं से सटे पांच अन्य राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ के साथ मिलकर संयुक्त खुफिया तंत्र विकसित करने पर जोर दिया। सीमावर्ती क्षेत्रों में इन राज्यों की पुलिस और एजेंसियां मिलकर समन्वित अभियान चलाएंगी ताकि अंतर-राज्यीय तस्करी के रास्तों को पूरी तरह बंद किया जा सके। इसके अलावा सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के परिसरों में नशीली दवाओं के इस्तेमाल को रोकने के लिए विशेष फ्रेमवर्क लागू किया जाएगा और एक समर्पित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन भी किया जाएगा।